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'किस्मत में जो भी लिखा हो, बांग्लादेश जरूर जाऊंगी...', 2 साल बाद शेख हसीना ने बताया घर वापसी का प्लान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि हो सकता है कि बांग्लादेश लौटने पर उन्होंने गिरफ्तार कर लिया जाए, हो सकता है कि उनकी जान ले ली जाए, लेकिन इन आशंकाओं के बावजूद वह दिसंबर में अपने देश लौटेंगी. दिसंबर विजय का महीना है. उन्होंने कहा कि "डर यह तय नहीं कर सकता" कि लोगों के प्रति उनका कर्तव्य क्या है.

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शेख हसीना ने दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने का ऐलान कर दिया है. (File Photo: PTI)
शेख हसीना ने दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने का ऐलान कर दिया है. (File Photo: PTI)

शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि मैंने अपनी वापसी का ऐलान कर दिया है और मैं दिसंबर में वापस जाऊंगी. उन्होंने कहा कि जाहिर है मैं सही समय पर तारीख का ऐलान करूंगी. पूर्व पीएम ने कहा कि वे लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था में यकीन करती हैं. अपनी वापसी से जुड़ी आशंकाओं पर शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश की सरकार जो चाहे करे, ये उनका काम है, लेकिन उन्होंने तय कर लिया है और वे दिसंबर में बांग्लादेश जाएंगी. 

बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल होने के ठीक 2 साल बाद 5 अगस्त 2026 को शेख हसीना ने दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में पत्रकारों को वर्चुअली संबोधित किया. इस दौरान उनका चेहरा नहीं दिखाई दे रहा था. हसीना ने ऑडियो संबोधन में दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के प्लान पर बात की. 

किस्मत में जो भी लिखा हो...

पूर्व पीएम से जब पूछा गया कि अगर बांग्लादेश लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया या देश में एंट्री नहीं दी गई तो वे क्या करेंगी. इस हसीना ने कहा कि, 'मेरी किस्मत में जो भी लिखा हो, मैं अपने लोगों के पास वापस जाऊंगी. जब मेरे प्यारे देशवासी तकलीफ में हों, तो मैं उनसे दूर नहीं रह सकती. मुझे पता है कि मुझे हिरासत में लिया जा सकता है या जेल भेजा जा सकता है. वे झूठे मामलों में सुनाए गए फैसलों को लागू करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन डर मेरे लोगों के प्रति मेरे कर्तव्य को तय नहीं कर सकता. मेरी ज़िंदगी निजी सुरक्षा के हिसाब-किताब से कहीं बढ़कर है.'

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संबोधन शुरू होते ही सिसक सिसककर रोईं हसीना

अपना संबोधन शुरू करते ही कई बार सिसक सिसक कर रो पड़ीं 78 वर्षीय शेख हसीना ने कहा कि 1981 में भी जब वे बांग्लादेश में एंट्री लेना चाह रही थीं तो उन्होंने रोकने की कोशिश की गई थी. 

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना का दिल्ली से पहला LIVE संबोधन... बोलते-बोलते रो पड़ीं

उन्होंने कहा, "1981 में जब मैं घर लौटी, तब भी उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश की थी; उस समय ज़ियाउर रहमान सत्ता में थे. लेकिन मैं वहां गई. 1983 में मुझे गिरफ़्तार किया गया, फिर 1985 और 1987 में भी. यहां तक कि 2007 में भी. उस समय भी मैं देश से बाहर थी, लेकिन जब मैं लौटना चाहती थी तो उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश की; फिर भी वे रोक नहीं पाए और मैं लौट पाई. मुझे पता है कि वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान भी ले सकते हैं. कुछ भी हो सकता है, लेकिन फिर भी मुझे जाना ही है."

बता दें कि 5 अगस्त 2024 में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना को अप्रत्याशित तरीके से दिल्ली आना पड़ा था. हसीना तब से दिल्ली में ही हैं. 

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शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश के लिए दिसंबर विजय का महीना है और वे दिसंबर में ही लौटेंगी. बता दें कि 16 दिसंबर 1971 को ही भारत ने पाकिस्तान को हरा कर बांग्लादेश को आजाद कराया था. बांग्लादेश इसे मुक्ति संग्राम के रूप में मनाता है.

ग्रेनेड के हमले भी मुझे नहीं रोक पाए

अपने संघर्ष के दिनों से प्रेरणा लेते हुए शेख हसीना ने कहा कि 1971 में वे अपनी मां के साथ जेल में थीं. उन्होंने कहा, "मेरे बेटे जॉय का जन्म भी जेल में ही हुआ था. 1975 में मैंने अपना परिवार खो दिया. मुझे 6 साल तक देश से बाहर रहना पड़ा. घर लौटने के बाद मैंने मिलिट्री शासन और राजनीतिक साज़िशों के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी. मुझ पर जानलेवा हमले की 19 बार कोशिशें हुईं. यहां तक कि 2004 में हुए ग्रेनेड हमले भी मुझे रोक नहीं पाए. इसलिए मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं है, बल्कि बांग्लादेश के भविष्य की चिंता है. मैं वापस लौटना चाहती हूं क्योंकि लोग सुरक्षा, विकास, खुशहाली और शांति के हकदार हैं. मेरी वापसी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अवामी लीग की वापसी का मकसद सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश को सही रास्ते पर लाना है. इसका मकसद देश में विकास, तरक्की, धर्मनिरपेक्षता और स्थिरता के रास्ते को फिर से शुरू करना है."

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शेख हसीना ने भारत को बांग्लादेश का मित्र राष्ट्र बताया. संकट के समय में भारत हमेशा हमलोगों के साथ रहा. वहीं उनके बेटे जॉय ने भारत का आभार जताते हुए कहा कि सत्ता से हटने के बाद भारत आने पर हसीना के साथ "किसी राष्ट्राध्यक्ष" जैसा व्यवहार किया गया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को धन्यवाद दिया कि उनके प्रवास के दौरान उन्हें "बेहद सम्मान, सेवाएं और सुरक्षा" दी गईं. 

हसीना को मिली है मौत की सजा

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई है. यह फैसला उनके खिलाफ कथित मानवता के विरुद्ध अपराध के मामले में सुनाया गया. अदालत ने यह फैसला शेख हसीना की अनुपस्थिति में दिया है.

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और उस कार्रवाई की जिम्मेदारी तत्कालीन प्रधानमंत्री के रूप में शेख हसीना पर थी. ट्रिब्यूनल ने उन्हें इन आरोपों में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड दिया है.

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