राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की विस्तृत रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं. सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में टिन्नू यादव की भूमिका पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से सामने आई है, जबकि ट्रस्ट पूर्व महासचिव चंपत राय को प्रबंधन में लापरवाही और निगरानी में नाकामी का जिम्मेदार ठहराया गया है, क्योंकि पूरा प्रबंधन उनके अधीन था. वहीं, 15 जुलाई यानी बुधवार को एसआईटी की जांच के लिए निर्धारित समयसीमा पूरी हो चुकी हैं. हालांकि, कुछ पहलुओं पर काम जारी होने के कारण SIT द्वारा सरकार से थोड़ा अतिरिक्त वक्त मांगे जाने की भी संभावना जताई जा रही है.
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, SIT की जांच रिपोर्ट में टिन्नू यादव की भूमिका पहले से कहीं अधिक स्पष्ट होकर सामने आई है. वह ट्रस्ट की आधिकारिक लिखापढ़ी का हिस्सा नहीं था, लेकिन वह चंपत राय के साथ बराबरी से काम देख रहा था. एसआईटी ने बिना नाम लिए संकेत दिया कि टिन्नू के पास मंदिर प्रबंधन की हर संवेदनशील जानकारी रहती थी और उसकी हर स्तर तक पहुंच थी.
टिन्नू के पास रहती थीं दान पात्रों की चाबी
जांच में ये भी पता चला है कि दान पात्रों (हुंडियों) की चाबियां भी टिन्नू के पास रहती थीं, जिसके लिए चंपत राय को परोक्ष रूप से जिम्मेदार माना गया है.
एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट में चंपत राय को पूरी तरह से क्लीन चिट नहीं दी गई है. पूरी व्यवस्था उनके अधीन होने के कारण उन्हें मंदिर प्रबंधन में गंभीर लापरवाही और निगरानी में पूरी तरह नाकाम रहने का जिम्मेदार माना गया है. हालांकि, इस पूरे मामले में उनकी आपराधिक साजिश की भूमिका पर SIT ने अभी कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है, क्योंकि पुलिस की कानूनी विवेचना अभी-भी जारी है.
नियमों में बदलाव से बनी चोरी की गुंजाइश
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया को चोरी की सबसे बड़ी वजहों में शामिल किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों को कमजोर किए जाने से ही मंदिर में चोरी की गुंजाइश बनी. जिन गणनाकर्मियों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है. वो वास्तव में आउटसोर्स हाउसकीपिंग कर्मचारी थे, जिनसे नियमों के खिलाफ जाकर चढ़ावे की गिनती कराई जा रही थी. इन कर्मचारियों की भर्ती बिना नियमों का पालन किए सिर्फ ट्रस्ट पदाधिकारियों की सिफारिश पर की गई थी.
इसके अलावा एसओपी (SOP) के नियमों को कमजोर करने और भर्ती प्रक्रिया में की गई भारी अनियमितताओं के लिए ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को सबसे अधिक जिम्मेदार ठहराया गया है.
कई पहलुओं पर जारी है जांच
हालांकि, रिपोर्ट पूरी तरह तैयार है और इसे कभी भी सरकार को भेजा जा सकता है, लेकिन एसआईटी आज अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपेगी. जांच के कुछ बेहद महत्वपूर्ण पहलुओं पर अभी-भी काम जारी होने के कारण एसआईटी की ओर से समय बढ़ाने का औपचारिक अनुरोध किए जाने की संभावना है. इससे पहले आई प्रारंभिक रिपोर्ट में एफआईआर (FIR) दर्ज करने और नए सीईओ की नियुक्ति की सिफारिश की गई थी, जिस पर वर्तमान में कार्रवाई जारी है.