राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब अयोध्या बार एसोसिएशन भी खुलकर सामने आ गया है. बार एसोसिएशन आज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर देने जा रहा है.
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने बताया कि आज (गुरुवार) दोपहर 12 बजे वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल थाना राम जन्मभूमि पहुंचकर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करेगा. यदि पुलिस नामजद तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं करती तो बार एसोसिएशन कोर्ट का रुख कर एफआईआर दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया अपनाएगा.
उन्होंने कहा कि चढ़ावा प्रकरण को लेकर अधिवक्ताओं में गहरा आक्रोश है. बार के इस कदम से राम मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों पर कानूनी शिकंजा और ज्यादा कसना तय माना जा रहा है.
रिकॉर्ड पर उठे सवाल
उधर, इस पूरे मामले की जांच अब बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुकी है. अयोध्या के क्षेत्राधिकारी और मामले के जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी ने मंगलवार यानी 30 जून को जिला जेल के अंदर मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से आमने-सामने बिठाकर गहन पूछताछ की थी.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 26 जून को गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से एक अविनाश शुक्ला ने जेल में हुई इस पूछताछ के दौरान ट्रस्ट के कुछ बड़े पदाधिकारियों की तरफ सीधे तौर पर उंगली उठाई है, जिससे पुलिस अब उसकी रिमांड मांग रही है.
बैंक स्टाफ भी SIT की रडार पर
पुलिस की जांच केवल मंदिर के कैश काउंटिंग स्टाफ तक ही सीमित नहीं है. नकदी की गिनती करने वाली टीम के आठ गिरफ्तार सदस्यों के अलावा, अयोध्या पुलिस ने अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के उन कर्मचारियों का पूरा ब्योरा मांगा है, जिन्हें मंदिर में नकदी की गिनती की निगरानी करने का काम सौंपा गया था.
सूत्रों के मुताबिक, विशेष रूप से स्टेट बैंक के ग्रेड तीन स्तर के दो कर्मचारी, जो नियमित रूप से राम मंदिर में पैसों की गिनती की देखरेख करते थे, अब पुलिस जांच टीम के रडार पर आ चुके हैं.
'किसी निर्दोष को नहीं फंसाया जाना चाहिए'
इस पूरे घटनाक्रम पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका सीधा-सा मानना है कि दोषी छूटना नहीं चाहिए और किसी निर्दोष को फंसाया नहीं जाना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा, 'कुछ ऐसे लोगों को भी इसमें घसीटा जा रहा है, जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी SIT सबको उठा रही है. जाहिर है, लोग इस पर प्रतिक्रिया देंगे. मैं जानता हूं कि कुछ लोग वहां निस्वार्थ भाव से काम करते थे, लेकिन आप जानते ही हैं कि अगर आप ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं तो आप पर भी चोर होने का ठप्पा लग जाता है.'
गुप्ता कहते हैं, 'एक बार गिरफ्तारी होने पर उन्हें जेल भेजना ही पड़ता है. और जब कोर्ट तारीख तय करता है तो सुनवाई होनी ही चाहिए; चाहे वो सीधे पेश हों या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए, कार्यवाही तो होगी ही. आजकल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आम बात है; अगर सुरक्षा की चिंता हो तो लोगों को फिजिकली कहीं ले जाया नहीं जाता. कोर्ट कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही मामले को देखता है...'