छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई. इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में CRPF और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों के योगदान की सराहना की. जवानों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों का सफाया हो चुका है, लेकिन नक्सलवाद का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने वैचारिक रूप से नक्सलवाद का समर्थन करने वाले लोगों को 'दिमागी नक्सली' बताते हुए उनसे सतर्क रहने की बात कही.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी कुछ लोग देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को भड़काने में जुटे हैं. उनके मुताबिक, ऐसे तत्वों ने कई संगठनों और राजनीतिक दलों में भी घुसपैठ कर ली है. पीएम मोदी ने कहा कि इन लोगों की पहचान करना, उन्हें परास्त करना और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल हथियारबंद उग्रवादियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए.
पीएम मोदी ने कहा कि माओवादी आतंक का खात्मा देश की सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत है. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी. एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से ज्यादा जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे. प्रधानमंत्री के मुताबिक, साल 2014 में केंद्र में उनकी सरकार आने के बाद इस समस्या से निपटने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हुई और सुरक्षा बलों को जरूरी फैसले लेने की आजादी दी गई.
प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सुरक्षा बलों के हाथ बांध दिए गए थे और माओवादी हमलों के बावजूद उन्हें प्रभावी जवाब देने की पूरी छूट नहीं मिलती थी. मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने जवानों को जरूरत के मुताबिक कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी. इसके साथ ही नक्सलियों और अलगाववादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद और दूसरे तरह के समर्थन को रोकने के लिए भी कदम उठाए गए.
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने नक्सलियों और अलगाववादियों के फंडिंग नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है. उन्होंने दावा किया कि सरकार के फैसलों से नकली करेंसी के नेटवर्क को खत्म करने और नक्सलियों की सप्लाई लाइन को बाधित करने में मदद मिली. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने व्यवस्था और सरकारी तंत्र के भीतर से वामपंथी उग्रवाद को मिलने वाले कथित समर्थन को रोकने का प्रयास किया. उनके मुताबिक, इन कदमों से माओवादी आतंकियों की ताकत कमजोर हुई.
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का उद्देश्य केवल हथियारबंद उग्रवादियों को खत्म करना नहीं, बल्कि प्रभावित इलाकों के लोगों का जीवन बदलना भी है. उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि किसी मां को अपना बच्चा न खोना पड़े, किसी परिवार का जीवन बर्बाद न हो और कोई बच्चा हथियार न उठाए. किसी युवा का भविष्य भी नक्सलवाद की वजह से तबाह नहीं होना चाहिए. पीएम मोदी के मुताबिक, सरकार ने बिना प्रचार और दिखावे के संवेदनशीलता के साथ काम किया और माओवादी आतंकियों की कमर तोड़ने की कोशिश की.
उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सेवा और विकास के कामों के जरिए लोगों का भरोसा जीतने का प्रयास किया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि नक्सलवाद से परेशान रहे लोग सरकार और सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हुए. प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों के त्याग और समर्पण के साथ स्थानीय लोगों का सहयोग भी अहम रहा है. उन्होंने बस्तर में आए बदलाव को इसी प्रयास का परिणाम बताया.
प्रधानमंत्री मोदी ने CRPF के जवानों की उपलब्धि का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछले एक साल के दौरान ड्यूटी के दौरान CRPF के किसी भी जवान की मौत नहीं हुई. पीएम के मुताबिक, पिछले 47 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है. उन्होंने इसे सुरक्षा बलों के साहस, समर्पण और सरकार की रणनीति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में CRPF और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवान लंबे समय से तैनात रहे हैं.
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 को देश को नक्सलवाद के खतरे से मुक्त घोषित करने का ऐलान किया था. उस समय सरकार ने बताया था कि नक्सली संगठनों के कई बड़े नेताओं और कैडरों को अभियान के दौरान खत्म किया गया, जबकि सैकड़ों लोगों ने आत्मसमर्पण किया. इस अभियान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और छत्तीसगढ़ पुलिस की अहम भूमिका रही. बस्तर लंबे समय तक छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद का प्रमुख केंद्र माना जाता था, लेकिन लगातार चले सुरक्षा अभियानों, बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण और विकास योजनाओं के विस्तार से यहां हालात में बदलाव आया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले अगस्त में 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से दिए गए भाषण में भी 'दिमागी नक्सलियों' का जिक्र किया था. उस दौरान उन्होंने कहा था कि देश ने जंगलों से हथियारबंद नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता हासिल की है, लेकिन इसके वैचारिक समर्थक अब भी हिंसा और अराजकता फैलाने के मौके तलाश रहे हैं. बस्तर में भी उन्होंने इसी खतरे को लेकर आगाह किया. उनका कहना था कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में मिली सफलता के बावजूद सतर्कता बनाए रखना जरूरी है.
बस्तर पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अपने कार्यक्रम की जानकारी दी थी. उन्होंने लिखा था कि वह बहादुर सुरक्षा बलों के साथ दिवाली मनाने बस्तर जा रहे हैं. पीएम ने कहा था कि जिस इलाके में कभी नक्सलवाद का प्रभाव था, वहां अब विकास की गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. उन्होंने जवानों के बलिदान, निस्वार्थ सेवा और देश के प्रति अटूट समर्पण को नमन करने की बात भी कही थी.
बस्तर में प्रधानमंत्री का यह दौरा इसलिए भी अहम रहा क्योंकि यह इलाका कई दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा था. यहां CRPF और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों ने लंबे समय तक नक्सल विरोधी अभियान चलाया. अब केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा के बाद क्षेत्र में विकास और सुरक्षा व्यवस्था के विस्तार पर जोर दे रही है. प्रधानमंत्री ने जवानों के साथ दिवाली मनाकर उनके योगदान को सम्मान दिया और नक्सलवाद के वैचारिक नेटवर्क को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की.