प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व के 25 साल पूरे होने पर अपने अब तक के सफर को याद करते हुए कहा कि वह आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो उनके मन में सिर्फ कृतज्ञता का भाव आता है. उन्होंने कहा कि उनके जीवन में आए हर व्यक्ति और हर घटना ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया. पीएम मोदी ने कहा, "जिसने मुझे जिताया, उसने मुझे विनम्र होना सिखाया और जिसने मुझे गिराया, उसने मुझे फिर खड़ा होना सिखाया."
पीएम मोदी ने कहा कि उनके शुभचिंतकों ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया, जबकि आलोचकों ने उन्हें अपने भीतर झांकना सिखाया. उन्होंने कहा कि साथ देने वालों ने उन्हें विश्वास की ताकत दिखाई और विरोध करने वालों ने लोकतंत्र की शक्ति समझाई.
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‘हर संकट ने धैर्य की परीक्षा ली’
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके 25 साल के सफर में हर संकट उनके धैर्य की परीक्षा रहा. वहीं, हर सफलता ने उनके दायित्व को और बढ़ाया. उन्होंने कहा कि हर उपलब्धि ने उन्हें बड़े लक्ष्यों की तरफ बढ़ने का साहस और जज्बा दिया.
पीएम मोदी ने कहा कि आज वह पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि उनके जीवन में कोई भी घटना व्यर्थ नहीं गई. हर घटना, हर अनुभव और हर मोड़ ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया.
‘मैं महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, मिशन के लिए जीता हूं’
पीएम मोदी ने कहा, "मैं महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, मिशन के लिए जीता हूं. कर्म ही मेरा धर्म है." उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन को किसी निजी महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि एक मिशन से जोड़कर देखा.
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उन्होंने कहा कि लंबे सार्वजनिक जीवन में मिले उतार-चढ़ाव ने उन्हें आगे बढ़ने की सीख दी है. जीत, हार, समर्थन, विरोध और मुश्किल हालात- हर अनुभव ने उनकी सोच को आकार दिया.
प्रधानमंत्री का यह संदेश उनके 25 साल के नेतृत्व के सफर पर केंद्रित रहा, जिसमें उन्होंने अपने अनुभवों को उपलब्धियों से ज्यादा सीख के तौर पर पेश किया. उन्होंने कहा कि आगे भी बड़े लक्ष्य सामने हैं और अब तक मिली हर सीख उनके लिए आगे की यात्रा की ताकत बनेगी.