संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन विपक्षी सांसदों का विरोध प्रदर्शन अलग अंदाज में नजर आया. कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा की अगुवाई में विपक्षी सांसद हाथों में खिलौना 'बंदर' और टेडी लेकर संसद परिसर में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने नारेबाजी करते हुए कहा, "56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर."
प्रदर्शन में महिला और पुरुष सांसद दोनों शामिल रहे. विपक्षी सांसदों ने इस प्रदर्शन के जरिए सरकार और प्रधानमंत्री पर सदन में आकर जवाब देने का दबाव बनाने की कोशिश की. यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब पूरे मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार गतिरोध बना रहा.
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विपक्ष की सबसे बड़ी मांग 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की थी. विपक्षी दलों ने छात्रों पर लाठीचार्ज और कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए. गृह मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की मांग की. सरकार की तरफ से अमित शाह ने चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही, लेकिन विपक्ष अलग और स्पष्ट बयान की मांग पर कायम रहा.
सदन के बाहर नारेबाजी, अंदर भी जारी रहा गतिरोध
विपक्ष ने इस दौरान अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने का अवसर दिए जाने की मांग भी उठाई. इन मुद्दों को लेकर सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई. सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते कई विधायी कामकाज भी हंगामे के बीच आगे बढ़े.
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हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मॉनसून सत्र
13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 'साइन डाई' यानी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. स्पीकर ओम बिरला ने लगातार नारेबाजी और व्यवधान पर नाराजगी जताई. उनके मुताबिक, सदन के लिए करीब 120 घंटे चर्चा और कामकाज का समय तय किया गया था, लेकिन लगातार गतिरोध के कारण लोकसभा करीब 37 घंटे ही काम कर सकी.