केंद्र सरकार ने संसद को बताया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दुनिया भर में पहले से ज्यादा समर्थन मिला है. सरकार के मुताबिक भारत लगातार दूसरे देशों के सामने पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है. यही वजह है कि अब 31 देशों और 6 बहुपक्षीय संगठनों के साथ आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह बनाए जा चुके हैं. इन मंचों के जरिए आतंकवाद से जुड़े मामलों पर नियमित रूप से चर्चा और सहयोग किया जा रहा है.
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत ने उच्चस्तरीय बैठकों, आधिकारिक दौरों और कूटनीतिक संपर्कों के दौरान लगातार सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया है. इन प्रयासों का असर यह हुआ है कि अब दुनिया के कई देशों ने भारत की चिंताओं को गंभीरता से स्वीकार किया है. मंत्री ने कहा कि कई देशों ने पाकिस्तान से साफ तौर पर कहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधियों के लिए न होने दे. सरकार का कहना है कि यह भारत की लगातार और प्रभावी कूटनीतिक रणनीति का नतीजा है.
सरकार ने बताया कि 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की निंदा दुनिया के कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों ने की. 25 अप्रैल 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रेस बयान में इस हमले का जिक्र किया गया. इसके अलावा 6 जून को हुई चौथी भारत-मध्य एशिया विदेश मंत्रियों की वार्ता, 16 जून को FATF के सार्वजनिक दस्तावेज, 1 जुलाई को QUAD विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान और 6 जुलाई 2025 को BRICS नेताओं के घोषणा पत्र में भी इस आतंकी हमले की निंदा दर्ज की गई. सरकार ने इसे भारत की कूटनीतिक सफलता बताया.
विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि पहलगाम हमले से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को अमेरिका ने 18 जुलाई 2025 को बड़ा झटका दिया। अमेरिका ने TRF को विदेशी आतंकवादी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया. सरकार के मुताबिक TRF, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का प्रॉक्सी संगठन माना जाता है और इसका संबंध पहलगाम हमले से भी जोड़ा गया है. इतना ही नहीं, 24 जुलाई 2025 को जारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति की 36वीं मॉनिटरिंग रिपोर्ट में भी TRF और पहलगाम हमले के बीच संबंधों का उल्लेख किया गया.
सरकार ने संसद में बताया कि अमेरिका ने 9 अप्रैल 2025 को 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत प्रत्यर्पित किया. अब वह भारत में मुकदमे का सामना कर रहा है. सरकार ने यह भी कहा कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रहा है, जिसके चलते पाकिस्तान में मौजूद कई आतंकी संगठनों और आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ (EU) और अन्य देशों ने प्रतिबंधित सूची में शामिल किया है. सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
सरकार ने वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) का भी जिक्र किया. संसद में बताया गया कि पाकिस्तान अब तक तीन बार FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल हो चुका है. सबसे हालिया अवधि जून 2018 से अक्टूबर 2022 तक रही. सरकार के अनुसार FATF की सख्त निगरानी के कारण पाकिस्तान को 26/11 मुंबई हमलों से जुड़े कुछ कुख्यात आतंकियों के खिलाफ भी कार्रवाई करनी पड़ी. सरकार का कहना है कि आतंकवाद के वित्तपोषण पर वैश्विक निगरानी ने पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए रखा है.
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने विदेश नीति से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के सिद्धांत पर आधारित है. उन्होंने कहा कि भारत के किसी भी देश के साथ द्विपक्षीय संबंध किसी तीसरे देश के रिश्तों से प्रभावित नहीं होते. उन्होंने स्पष्ट किया कि BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे समूहों में भारत की सक्रिय भागीदारी का असर उसके अन्य रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंधों पर नहीं पड़ता. सरकार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है.