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'शिक्षा सिर्फ रोजी-रोटी कमाने के लिए नहीं...', नागौर में बोले RSS चीफ मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने जीवन में केवल सफलता पाने से अधिक महत्वपूर्ण सार्थक इंसान बनने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि आज समाज को ऐसे लोगों की जरूरत है जो अपने व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर समाज और धर्म की विजय के लिए काम करें.

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राजस्थान के नागौर जिले के गोटन में एक निजी शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम में पहुंचे थे RSS चीफ मोहन भागवत (Photo: Screengrab)
राजस्थान के नागौर जिले के गोटन में एक निजी शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम में पहुंचे थे RSS चीफ मोहन भागवत (Photo: Screengrab)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि जीवन में केवल सफलता हासिल करने से ज्यादा महत्वपूर्ण एक 'सार्थक' इंसान बनना है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया को ऐसे लोगों की ज्यादा जरूरत है, जो केवल अपनी सफलता के बारे में न सोचें, बल्कि समाज और व्यापक हित के लिए भी योगदान दें.

मोहन भागवत शनिवार को राजस्थान के नागौर जिले के गोटन में एक निजी शिक्षण संस्थान के वार्षिक समारोह में छात्रों को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने छात्रों से जीवन में सफल होने के साथ-साथ अपने जीवन को सार्थक बनाने की दिशा में भी प्रयास करने की अपील की. भागवत ने कहा, 'सफल इंसान बनने से ज्यादा महत्वपूर्ण सार्थक इंसान बनना है. हमारे विद्यार्थी निश्चित रूप से सफल बनेंगे, लेकिन केवल सफल होने से ज्यादा महत्वपूर्ण सार्थक बनना है.'

'जीत असुर विजय नहीं, धर्म विजय होनी चाहिए'

RSS प्रमुख ने स्पष्ट किया कि सार्थक जीवन की बात करने का यह मतलब नहीं है कि व्यक्ति को सफलता की आकांक्षा नहीं रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जीत हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए और हमारा समाज भी विजय की आकांक्षा रखता है. भागवत ने कहा, 'विजय की आकांक्षा होनी चाहिए. हमारा समाज भी विजय की आकांक्षा रखता है, लेकिन वह विजय 'असुर विजय' नहीं, बल्कि 'धर्म विजय' होनी चाहिए.'

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उन्होंने कहा कि आज दुनिया में सार्थक जीवन जीने वाले लोगों की ज्यादा आवश्यकता है. संघ समेत विभिन्न व्यक्ति और संगठन अपने-अपने तरीके से ऐसे लोगों को तैयार करने और इस दिशा में काम करने का प्रयास कर रहे हैं.

'शिक्षा सिर्फ आजीविका कमाने के लिए नहीं'

छात्रों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने शिक्षा के उद्देश्य पर भी बात की. उन्होंने कहा कि इंसान के पास अच्छा या बुरा बनने का विकल्प होता है और सही रास्ता चुनने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है. भागवत ने कहा, 'मनुष्य ईश्वर जैसा भी बन सकता है और शैतान भी बन सकता है. उसे यह चुनने की स्वतंत्रता दी गई है कि वह क्या बनना चाहता है. सही विकल्प चुनने में मदद के लिए शिक्षा आवश्यक है.'

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी हासिल करना या आजीविका कमाना नहीं होना चाहिए. शिक्षा व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने और अपने जीवन को सार्थक बनाने में भी मदद करती है.

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