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नेपाल की तबाही के बीच क्यों उफान पर है मंदाकिनी नदी, चित्रकूट में खतरा

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में मंदाकिनी और यमुना नदियों के उफान के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. मंदाकिनी नदी ने पिछले चार दिनों में तीसरी बार खतरे के निशान को पार किया है.

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चित्रकूट से एमपी के सतना तक मंदाकिनी नदी अपने रौद्र रूप में बह रही है
चित्रकूट से एमपी के सतना तक मंदाकिनी नदी अपने रौद्र रूप में बह रही है

नेपाल में आए फ्लैश फ्लड से हुई जनहानि का दुख कम नहीं हुआ है, और लगातार हिमालयी तलहटी में खतरा बरकरार है तो वहीं मैदानी इलाकों में भी डर कुछ कम नहीं हैं. डर का नया सेंटर बनकर उभरा है चित्रकूट, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दोनों ही राज्यों में फैला हुआ है और यहां बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है. 

'चित्रकूट की लाइफ लाइन' कही जाने वाली मंदाकिनी नदी ने पिछले कुछ दिनों में कई बार खतरे का निशान पार किया है. हालांकि एक दिन पहले मंदाकिनी का जलस्तर कम हुआ था, लेकिन उसका पानी यमुना में पहुंचने के बाद नई मुसीबत खड़ी हो गई है. यमुना नदी के उफान और पानी के बैक फ्लो के कारण राजापुर तहसील के कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं. इससे एक दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से टूट गया है. प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी करते हुए NDRF और SDRF की टीमों को तैनात किया है.

पिछले दिनों मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ ने चित्रकूट में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी. 29 अगस्त को नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद कई इलाके पानी में डूब गए थे. सैकड़ों साल पुराना पुल बह गया और बड़ी संख्या में गांव बाढ़ से प्रभावित हुए. इसके बाद नदी का जलस्तर घटा, लेकिन लगातार बारिश के बीच इसमें फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई.

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चार दिन में तीसरी बार खतरे के निशान के पार पहुंची मंदाकिनी

मंदाकिनी नदी पिछले चार दिनों में तीसरी बार खतरे के निशान से ऊपर पहुंची, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों में फिर दहशत फैल गई. रामघाट समेत आसपास के घाट पानी में डूब गए और कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए.

हालांकि बारिश थमने के बाद मंदाकिनी का जलस्तर अब नीचे आने लगा है. लेकिन मंदाकिनी का पानी आगे जाकर यमुना नदी में मिलने से राजापुर इलाके में खतरा बढ़ गया है. यमुना पहले से उफान पर है, ऐसे में पानी के बैक मारने से आसपास के गांवों और संपर्क मार्गों में बाढ़ का पानी पहुंच रहा है.

एक दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क टूटा

राजापुर तहसील में सरधुआ से तिरहार जाने वाले मुख्य मार्ग पर बाढ़ का पानी भर गया है. इसकी वजह से अर्की, बकता, बिहारवा, नैनी, गुरौला, सुरवल और भदेदूं समेत एक दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से प्रभावित हुआ है.

सरधुआ के अर्की मोड़ के आसपास बने घरों में भी पानी घुस गया है. हालात बिगड़ते देख ग्रामीण अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं. पहाड़ी ब्लॉक के कई पटिया और चौरा जैसे गांवों में भी बाढ़ का पानी घरों में घुसने की सूचना है. प्रभावित परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं.

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यमुना का जलस्तर 91 मीटर तक पहुंचा

चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के मुताबिक, राजापुर क्षेत्र के चार से पांच संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी पहुंच गया है. मंदाकिनी में बढ़ा पानी अब इस इलाके में पहुंच रहा है. राजापुर में यमुना का डेंजर लेवल करीब 88 मीटर है, जबकि जलस्तर करीब 91 मीटर तक पहुंच गया है.

प्रशासन को आशंका है कि पानी हाई लेवल तक पहुंच सकता है. इसी को देखते हुए बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों से इंतजार न करने और समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है.

डीएम और एसपी ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया है. प्रशासन की टीमें अलर्ट मोड पर हैं. NDRF और SDRF को भी तैनात किया गया है, ताकि रास्ते बंद होने या लोगों के फंसने की स्थिति में तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सके.

मध्य प्रदेश के चित्रकूट में भी बढ़ा मंदाकिनी का पानी

मंदाकिनी का असर उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के साथ मध्य प्रदेश की तरफ भी दिखाई दे रहा है. मऊकामगढ़ ब्रिज के आसपास नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पुल के डूबने की आशंका बनी हुई है. एहतियात के तौर पर NDRF, SDRF और सतना पुलिस के जवान इलाके में पेट्रोलिंग कर रहे हैं.

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बाढ़ का पानी उतरने वाले क्षेत्रों में अब सफाई और पुनर्बहाली का काम भी शुरू हो गया है. सतना स्मार्ट सिटी और नगर निगम की टीमें मशीनों और कर्मचारियों की मदद से सड़कों से कीचड़ और मलबा हटाने में जुटी हैं.

बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाई जा रही राहत सामग्री

प्रशासन बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री भी पहुंचा रहा है. सैकड़ों लोगों को राहत किट वितरित की जा चुकी हैं. शहर में प्रभावित पेयजल व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की कोशिश की जा रही है. मंदाकिनी पुल की क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड की मरम्मत का काम भी किया गया है.

बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्थानीय लोग और व्यापारी भी आगे आ रहे हैं. युवा व्यापारी विवेक आसवानी ने प्रशासन को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद का चेक सौंपा है. इस रकम का इस्तेमाल बाढ़ पीड़ितों के लिए खाद्य सामग्री और राहत किट उपलब्ध कराने में किया जाएगा.

मंत्री ने भी किया था बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और चित्रकूट के प्रभारी मंत्री नंद गोपाल नंदी ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. उन्होंने रामघाट पर हालात का जायजा लेने के साथ बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की और राहत सामग्री वितरित की.

प्रशासन की ओर से बाढ़ से मकानों, दुकानों, फसलों और दूसरी संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यमुना के बढ़ते जलस्तर को लेकर है. प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है.

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