केरल में सरकार गठन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. पार्टी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दी है. सूत्रों के मुताबिक, आलाकमान किसी भी जल्दबाजी में नहीं है और तीन मुख्य बिंदुओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा. सबसे पहला आधार नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों की राय है, जिसे पर्यवेक्षकों ने व्यक्तिगत बातचीत के जरिए दर्ज किया है.
दूसरा अहम पहलू यूडीएफ (UDF) गठबंधन के सहयोगियों के विचार हैं. कांग्रेस अपने छोटे दलों को साथ लेकर चलना चाहती है, जिससे सरकार में स्थिरता बनी रहे.
तीसरा और सबसे बड़ा पैमाना 'मास अपील' यानी जनता के बीच लोकप्रियता है. नेतृत्व यह देख रहा है कि कौन सा चेहरा केरल की जनता की उम्मीदों पर सबसे खरा उतर सकता है.
केरल CM की रेस में कौन से दिग्गज?
केरल की सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी, इसके लिए फिलहाल तीन बड़े नाम रेस में सबसे आगे चल रहे हैं. पहले हैं संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, जिनका दिल्ली और केरल दोनों जगह मजबूत प्रभाव है. दूसरे दावेदार वी.डी. सतीशन हैं, जिन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर विधानसभा में सरकार को घेरा और युवाओं के बीच पैठ बनाई. तीसरे नंबर पर अनुभवी नेता रमेश चेन्निथला हैं, जिनके पास सियासत का लंबा अनुभव है.
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आलाकमान पहले तीनों नेताओं से फोन पर बातचीत करेगा. अगर मान गए तो नाम का ऐलान हो जाएगा, नहीं तो तीनों को दिल्ली बुलाकर उनसे बातचीत की जाएगी, उसके बाद सीएम के चेहरे का ऐलान किया जाएगा.
मुख्यमंत्री पद को लेकर सहयोगी दलों ने भले ही अपनी राय रखी हो, लेकिन उसका कांग्रेस के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा. मुख्यमंत्री चेहरा कांग्रेस अपने हिसाब से तय करेगी.