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केरलम में तीन CM दावेदारों के समर्थक भिड़े... कोई दे रहा धमकी, कोई कर रहा इमोशनल ब्लैकमेल

केरलम विधानसभा चुनाव में यूडीएफ ने 102 सीटें जीती हैं, जबकि एलडीएफ को 35 और बीजेपी को 3 सीटें मिली हैं.

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केरलम में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रमेश चन्नीथला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल हैं. (Photo: PTI)
केरलम में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रमेश चन्नीथला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल हैं. (Photo: PTI)

केरलम में कांगेस के नेतृत्व में यूडीएफ की जीत के साथ ही अगले मुख्यमंत्री को लेकर औपचारिक चर्चा शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया पर एक नई जंग शुरू हो गई है. केरलम के नए मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस के तीन संभावित दावेदारों वीडी सतीशन, रमेश चन्नीथला और केसी वेणुगोपल के समर्थकों के बीच जबरदस्त बहस छिड़ गई है. 

राज्य में कांग्रेस की शानदार वापसी के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर यूडीएफ नेताओं और कार्यकर्ताओं को बधाई दी और इसे कड़ी मेहनत और बेहतरीन तरीके से चलाया गया अभियान बताया. उनकी पोस्ट के कुछ ही मिनटों में कमेंट सेक्शन वीडीएस के मैसेज से भर गया, जहां समर्थकों ने वीडी सतीशन को अगला मुख्यमंत्री बताना शुरू कर दिया. इसके बाद की हरेक कमेंट में सतीशन को सीएम बताया जाने लगा. 

नसरुद्दीन मन्नारक्काड नाम के एक यूजर ने पोस्ट कर कहा कि राहुल जी, जब 2021 में यूडीएफ जीत नहीं पाई, तब लोगों को लगा था कि वापसी करना मुश्किल होगा लेकिन वीडी सतीशन ने लोगों को भरोसा दिलाया. उन्हें मुख्यमंत्री पद से कम कुछ नहीं मिलना चाहिए.

सूर्य केएस नाम के एक यूजर ने कहा कि सीएम के लिए सिर्फ एक नाम- वीडी सतीशन. कृपया खेल मत खेलिए. इसी तरह सैकड़ों लोगों ने अपनी राय जताई. यह तो बस शुरुआत थी. जल्द ही अन्य नेताओं के समर्थक भी इस बहस में कूद पड़े और सोशल मीडिया पर यह एक तरह का वॉर बन गया, जहां राहुल गांधी के पोस्ट पर सतीशन के पक्ष में भारी समर्थन दिखा.

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वहीं, केसी वेणुगोपाल के समर्थन में भी एक समानांतर कैंपेन देखने को मिला. कुछ लोग रमेश चेन्नीथला के लिए पैरवी करने लगे और उन्हें सीएम पद का उपयुक्त दावेदार बताने लगे.

सतीशन के समर्थन में क्यों उमड़ रहा जनसैलाब!

यह ऑनलाइन जंग केवल बहस तक सीमित नहीं है. कुछ लोग पार्टी नेतृत्व को खुले पत्र लिख रहे हैं, तो कुछ अपने पसंदीदा नेता को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने पर पार्टी छोड़ने की धमकी तक दे रहे हैं.

एक फेसबुक यूजर ने कहा कि यह जीत सिर्फ कांग्रेस की नहीं, बल्कि सतीशन की भी है. उन्होंने दिन-रात मेहनत कर यह जीत सुनिश्चित की. उनमें मुख्यमंत्री बनने की दूरदृष्टि भी है.  उन्होंने अन्य दो नेताओं से अपील की कि वे सार्वजनिक रूप से कहें कि वे इस दौड़ में नहीं हैं, क्योंकि जनता का मूड बिल्कुल साफ है.

कांग्रेस कार्यकर्ता जोबी जोबिन ने कहा कि अगर वीडी सतीशन मुख्यमंत्री नहीं बने तो मैं भी यूडीएफ के लिए काम करना बंद कर दूंगा. वीडी सतीशन, जो केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रह चुके हैं.

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उन्होंने पिछले पांच वर्षों में कई अहम मौकों पर वामपंथी सरकार का कड़ा विरोध किया और 2021 की हार के बाद कांग्रेस को फिर से खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई. यही वजह है कि उनके समर्थकों में उन्हें सीएम पद का सही उम्मीदवार बताए जाने का जोश है.

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वेणुगोपाल को लेकर क्या कह रहे एक्सपर्ट?

दूसरी ओर, केसी वेणुगोपाल के समर्थन में भी मजबूत आवाज उठ रही है. हालांकि उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा, फिर भी उनका नाम शुरुआत से ही चर्चा में रहा. उन्होंने खुद भी इस संभावना से इनकार नहीं किया. उनके समर्थकों का दावा है कि नवनिर्वाचित विधायकों का बड़ा हिस्सा उनके साथ है.

एक यूजर ने लिखा कि यूडीएफ की इस बड़ी जीत की असल नींव केसी वेणुगोपाल की माइक्रो मैनेजमेंट रणनीतियों में थी. उन्होंने कहा कि पारंपरिक पोस्टर कैंपेन के बजाए उन्होंने हर बूथ के मतदाताओं के सटीक डेटा विश्लेषण के आधार पर पूरी रणनीति तैयार की. एक यूजर ने भी उन्हें इस जीत का आर्किटेक्ट और इलेक्टोरल पॉलिटिक्स का असली इंजीनियर बताया.

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हालांकि, सोशल मीडिया कमेंटेटर आबिद अदिवारम का मानना है कि वेणुगोपाल को सार्वजनिक रूप से सतीशन के समर्थन में आना चाहिए. उनके अनुसार, इससे वेणुगोपाल की छवि एक किंगमेकर के रूप में उभरेगी और उनका कद और बढ़ेगा.

उन्होंने कहा कि जरा सोचिए, अगर केसी वेणुगोपाल खुद घोषणा करें कि वीडी सतीशन मुख्यमंत्री होंगे, तो कितना उत्साह पैदा होगा. वे तब किंगमेकर के रूप में उभरेंगे और उनका प्रभाव और बढ़ेगा.

इस बीच, चेन्नीथला ने साफ कहा है कि सोशल मीडिया का रूझान मुख्यमंत्री तय नहीं करता. उनका मानना है कि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान ही करेगा. माना जाता है कि उन्हें नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) और श्री नारायण धर्म परिपालना (SNDP) योगम जैसे संगठनों का समर्थन प्राप्त है.

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सोशल मीडिया तय नहीं करता. हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन सही फैसला कांग्रेस हाईकमान ही लेगा. बता दें कि यूडीएफ ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीती हैं, जबकि एलडीएफ को 35 और बीजेपी को 3 सीटें मिली हैं.

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