बारामूला से सांसद इंजीनियर राशीद ने सोमवार को तिहाड़ जेल से संसद तक सिम्बोलिक नंगे पैर मार्च शुरू किया. इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों को लेकर एक दिन की भूख हड़ताल भी शुरू की. राशीद ने सेंट्रल गवर्नमेंट से जम्मू-कश्मीर के चुने प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ , समय बातचीत शुरू करने की मांग की है. इसके अलावा उन्होंने अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A की बहाली के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के लोगों के सभी लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार बहाल करने की भी मांग उठाई.
वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस की ब्रीफिंग में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि जो लोग खुद कोई प्रयास नहीं करते, उनके लिए आलोचना करना आसान होता है. उन्होंने कहा कि पहले जब उनकी पार्टी ने ऑटोनॉमी का प्रस्ताव पारित किया था, तब भी कुछ लोगों ने उसका विरोध किया था.
उमर अब्दुल्ला ने पीडीपी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2000 में इस पार्टी को बनाकर केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज कमजोर करने का काम किया था. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने सभी दलों को साथ आने का बुलावा दिया था, लेकिन कुछ दल न सिर्फ इसमें शामिल नहीं हुए, बल्कि इस कोशिश को विफल करने की भी कोशिश की.
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार इस विरोध प्रदर्शन के बाद क्या फैसला करेगी, यह उन्हें नहीं पता. हालांकि उन्होंने कहा कि स्टेटहुड बहाल कराना फिलहाल सबसे जरूरी मुद्दा है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में अनुच्छेद 370 की बहाली की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है. ऐसे में स्टेटहुड और अनुच्छेद 370 के मुद्दे को एक साथ जोड़ने से दोनों ही लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है.