
ब्रिक्स समिट के लिए नई दिल्ली पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इंडिया टुडे ग्रुप एडिटर (फॉरेन अफेयर्स) गीता मोहन से बातचीत में कई बड़े मुद्दों पर खुलकर बात की. पीएम मोदी के साथ उनकी करीब 45 मिनट तक मुलाकात हुई, जिसमें चाबहार बंदरगाह में भारतीय निवेश और आपसी सहयोग पर चर्चा हुई. राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायल के साथ जंग, प्रतिबंध, परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर भी अपनी बात रखी.

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि जब से मैंने पद संभाला है, भारत के प्रधानमंत्री के साथ हमारे संबंध लगातार बेहतर हो रहे हैं. हमारे दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं. ईरान और भारत लंबे समय से एक-दूसरे के साथ जुड़े रहे हैं. हमारा इतिहास कई हजार साल पुराना है.
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हम इन संबंधों को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं और इन्हें अपनी गहरी जड़ों वाली संस्कृति पर आधारित करना चाहते हैं. ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि हम दोनों देश एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं.
जब ईरान के राष्ट्रपति से पूछा गया कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. युद्ध और वहां हुए हमलों के बीच आपको चाबहार की भारत के लिए व्यावहारिकता कितनी मजबूत नजर आती है, तो ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि जहां तक चाबहार और भारत के साथ उसके संबंधों की बात है, ईरान एक बेहद महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति में स्थित है. क्षेत्रीय परिवहन और संपर्क के लिहाज से ईरान एक चौराहा है. यह दक्षिण को उत्तर से और पश्चिम को पूर्व से जोड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और वैज्ञानिक संबंध विकसित करने का यह सबसे आसान और किफायती रास्ता है. अतीत में भी ईरान सिल्क रोड का हिस्सा रहा है और सभ्यताओं के बीच संपर्क इन्हीं रास्तों से विकसित हुआ था. अब हम इस मार्ग को फिर से सक्रिय कर सकते हैं. हम इसके लिए तैयार हैं और हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए.