नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने बुधवार को इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (ITPI) से जुड़े मान्यता (Recognition) विवाद की CBI और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) से जांच कराने की मांग की. यह मांग इंडिया टुडे की उस रिपोर्ट के बाद उठाई गई, जिसमें ITPI द्वारा प्लानिंग संस्थानों और पाठ्यक्रमों को मान्यता देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे. NSUI ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट में क्या सामने आया
इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सामने आया कि ITPI एक पंजीकृत गैर-लाभकारी पेशेवर संस्था है, न कि कोई वैधानिक नियामक (Statutory Regulator). इसके बावजूद वह प्लानिंग संस्थानों को मान्यता दे रहा है, जबकि उसके पास किसी भी शैक्षणिक संस्थान को संबद्धता, प्रत्यायन (Accreditation) या मान्यता देने का कानूनी अधिकार नहीं है. रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कई कॉलेज खुद को ITPI से "मान्यता प्राप्त" बताते हैं, जिससे छात्रों और नियोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई गई है.
NSUI की मांगें
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि ITPI की मान्यता प्रक्रिया के कानूनी आधार की गहन जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि नियामकीय अस्पष्टता के कारण हजारों प्लानिंग छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकता. NSUI ने ITPI की मान्यता प्रक्रिया, प्रशासनिक व्यवस्था और उससे जुड़े वित्तीय मामलों की CBI और SFIO से जांच, शिक्षा मंत्रालय से प्लानिंग संस्थानों की मान्यता के कानूनी ढांचे पर स्पष्ट जवाब, B.Plan और M.Plan के छात्रों के हितों की सुरक्षा तथा प्लानिंग शिक्षा के लिए एक पारदर्शी वैधानिक नियामक व्यवस्था बनाने की मांग की.
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
विनोद जाखड़ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो NSUI देशभर में आंदोलन शुरू करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार को प्लानिंग शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए. जाखड़ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे विवादों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग की.