कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों का दायरा जैसे-जैसे देश में बढ़ रहा है, कानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार की चिंता भी गहरी हो गई है. इसी सिलसिले में सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने के लिए एक बड़ी बैठक बुलाई गई. खुफिया विभाग के प्रमुख ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGPs) के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के आला अधिकारियों संग उच्चस्तरीय समीक्षा की. इस दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर समेत अलग-अलग राज्यों में चल रहे आंदोलनों की स्थिति पर चर्चा हुई. साथ ही सभी राज्यों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सबसे पहले दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा हुई. क्योंकि, जंतर-मंतर अभी भी आंदोलन का मुख्य केंद्र बना हुआ है, इसलिए वहां की स्थिति पर विशेष फोकस रखा गया. इसके अलावा दूसरे राज्यों में प्रदर्शन किस तरह बढ़ रहे हैं, इस पर भी विस्तार से समीक्षा की गई.
आंकड़ों के मुताबिक, इस आंदोलन की सबसे ज्यादा आंच महाराष्ट्र में महसूस की जा रही है. राज्य में अब तक करीब 100 जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं. मुंबई, नागपुर और पुणे जैसे बड़े शहर आंदोलन के मुख्य केंद्र बने हुए हैं. महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, असम और हरियाणा में भी विरोध की आवाजें तेज हुई हैं. इन राज्यों की पुलिस को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है.
गैर-बीजेपी राज्यों में शांति का माहौल
एक तरफ जहां कई राज्यों में हलचल तेज है, वहीं कुछ इलाकों में स्थिति पूरी तरह शांत है. जम्मू-कश्मीर और मणिपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अब तक कोई विरोध प्रदर्शन दर्ज नहीं हुआ है. इसके अलावा पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे गैर-बीजेपी शासित राज्यों में भी आंदोलन का असर बेहद कम देखने को मिला है. फिर भी एहतियात के तौर पर पूरे देश के पुलिस तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है.
बीजेपी शासित राज्यों के लिए विशेष हिदायत
बैठक में खुफिया अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी शासित राज्यों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो सकती है. वहां अचानक इक्का-दुक्का हिंसा या प्रदर्शन की आशंका जताई गई है. इसी को देखते हुए सभी DGPs को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने इलाकों में मुस्तैदी बढ़ाएं. कानून-व्यवस्था किसी भी हाल में न बिगड़े, इसके लिए पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स को अलर्ट रहने को कहा गया है.