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इंटेलिजेंस ब्यूरो

इंटेलिजेंस ब्यूरो

इंटेलिजेंस ब्यूरो

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भारत की आंतरिक खुफिया और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख सरकारी एजेंसी है. यह गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है और देश के भीतर सुरक्षा से जुड़े मामलों पर जानकारी जुटाने, उनका विश्लेषण करने और संबंधित सरकारी विभागों तक पहुंचाने का कार्य करती है. जून 2026 से महेश दीक्षित इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं. आईबी का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसका संचालन केंद्र तथा राज्यों दोनों स्तरों पर किया जाता है.

आईबी की शुरुआत 23 दिसंबर 1887 को ब्रिटिश शासन के दौरान "सेंट्रल स्पेशल ब्रांच" के रूप में हुई थी. उस समय इसका उद्देश्य राजनीतिक गतिविधियों और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़ी सूचनाएं एकत्र करना था. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद बदलते राजनीतिक माहौल को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने इस एजेंसी का गठन किया था. बाद में समय के साथ इसकी संरचना और कार्यप्रणाली में कई बदलाव किए गए.

साल 1904 में भारतीय पुलिस आयोग की सिफारिशों के बाद "सेंट्रल क्रिमिनल इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट" का गठन किया गया. इसी दौरान प्रांतों में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) भी स्थापित किए गए. इसके बाद 1920 में इस विभाग का नाम बदलकर "इंटेलिजेंस ब्यूरो" रखा गया. उस समय यह एजेंसी ब्रिटिश भारत सरकार और लंदन स्थित भारतीय राजनीतिक खुफिया कार्यालय के बीच सूचना साझा करने का भी काम करती थी.

भारत को आजादी मिलने के बाद 1947 में इंटेलिजेंस ब्यूरो को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन लाया गया. टीजी संजीवी पिल्लै स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय निदेशक बने. शुरुआती वर्षों में आईबी देश के भीतर और देश के बाहर, दोनों तरह की खुफिया जानकारी जुटाने का कार्य करती थी.

साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद देश की खुफिया व्यवस्था की समीक्षा की गई. इसके बाद 1968 में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का गठन किया गया, जिसे विदेशों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई. इसके बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो का मुख्य कार्यक्षेत्र देश के भीतर सुरक्षा और आंतरिक खुफिया मामलों तक सीमित कर दिया गया.

आईबी का संचालन गृह मंत्रालय के अधीन होता है और इसका नेतृत्व निदेशक (डायरेक्टर) करते हैं. निदेशक के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग स्तरों पर एजेंसी के कामकाज का संचालन करते हैं. संगठन में विभिन्न श्रेणियों के अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त होते हैं, जिनमें सुरक्षा सहायक, जूनियर इंटेलिजेंस अधिकारी, असिस्टेंट सेंट्रल इंटेलिजेंस अधिकारी, उप निदेशक, संयुक्त निदेशक, अतिरिक्त निदेशक और विशेष निदेशक जैसे पद शामिल हैं.

राज्यों में भी इंटेलिजेंस ब्यूरो की इकाइयां कार्य करती हैं. यहां केंद्रीय खुफिया अधिकारी राज्य सरकारों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं. विभिन्न राज्यों में विशेष शाखाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जानकारी एकत्र की जाती है और आवश्यकता के अनुसार केंद्रीय मुख्यालय तक पहुंचाई जाती है.

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची में "सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंटेलिजेंस" का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा, इंटेलिजेंस ऑर्गेनाइजेशंस (रिस्ट्रिक्शन ऑफ राइट्स) अधिनियम, 1985 में भी आईबी को केंद्र सरकार की खुफिया और प्रति-खुफिया संस्था के रूप में मान्यता दी गई है. सरकार के अनुसार, आईबी एक नागरिक (सिविलियन) संगठन है और इसे सामान्य पुलिस जैसी गिरफ्तारी या कानून लागू कराने की शक्तियां प्राप्त नहीं हैं.

आईबी केंद्र और राज्य स्तर पर अपने नेटवर्क के माध्यम से सूचनाएं एकत्र करती है. इन जानकारियों का विश्लेषण करने के बाद आवश्यक रिपोर्ट संबंधित सरकारी विभागों और नीति-निर्माताओं तक भेजी जाती है. समय-समय पर संगठन की प्रशासनिक संरचना और कार्य प्रणाली में बदलाव किए जाते रहे हैं ताकि बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप इसका संचालन किया जा सके.
 

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