31 जुलाई से देशभर में कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है. इस बार हरिद्वार से बागपत तक निकाली गई 251 फुट लंबी तिरंगा कांवड़ यात्रा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इस यात्रा के जरिए कांवड़ियों ने शिवभक्ति के साथ देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी दिया. पूरे रास्ते 'हर-हर महादेव' के जयघोष गूंजते रहे.
इस यात्रा में करीब 40 श्रद्धालु शामिल हुए. उनके हाथों में 251 फुट लंबा तिरंगा था, जो लोगों के बीच खास आकर्षण बना. कांवड़ियों का कहना है कि उनका उद्देश्य देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है.
यह यात्रा जहां-जहां पहुंची, वहां लोगों ने कांवड़ियों का फूल बरसाकर गर्मजोशी से स्वागत किया. बहुत ही उत्साह के साथ लोगों ने इस यात्रा के साथ तस्वीरें भी खिंचाई.
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कांवड़ यात्रा कई तरह की होती है, जैसे:
सामान्य कांवड़ यात्रा- इसमें श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, जब उन्हें थकान होती है तो वे कांवड़ स्टैंड पर रखकर थोड़ी देर आराम करते हैं और फिर नियमों का पालन करते हुए यात्रा शुरू करते हैं.
डाक कांवड़ यात्रा- यह सबसे मुश्किल कांवड़ यात्रा मानी जाती है क्योंकि इसमें गंगाजल लेने के बाद श्रद्धालु बिना रुके दौड़ते हैं और तय समय में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.
दंडी (दंडवत) कांवड़ यात्रा- इसे भी बहुत मुश्किल माना जाता है. दंड़ी कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु दंडवत करते हुए मंदिर तक जाते हैं.
देश भर में कांवड़ियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. अलग-अलग स्थानों पर उनके लिए शिविर की व्यवस्था की गई है. यहां कांवड़ियों के लिए भोजन से लेकर चिकित्सीय सुविधाएं तक उपलब्ध हैं.
सोमवार, 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है. देश के अलग अलग मंदिरों में इस अवसरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. सावन के पहले सोमवार के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव की मंगला आरती की गई.