सावन के पवित्र महीने में शिव भक्त कांवड़ यात्रा (Kanwad Yatra) पर निकलते हैं. इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होगी. कांवड़िया उत्तराखंड के हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री के हिंदू तीर्थ स्थानों में गंगा नदी के पवित्र जल लाते हैं और शिवलिमग पर अर्पित करते हैं.
इसे अपने कंधों पर इस जल को लेकर सैकड़ों मील की यात्रा करते हैं और अपने स्थानीय शिव मंदिरों में शिव पर अर्पित करते हैं. कई भक्त बागपत जिले के पुरा महादेव मंदिर और मेरठ में औघड़नाथ मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर, देवघर में बैद्यनाथ मंदिर आदि जैसे विशिष्ट मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं.
1980 के दशक के उत्तरार्ध तक यह यात्रा कुछ संत और पुराने भक्त ही कांवडड यात्रा पर जाते थे. आज, विशेष रूप से हरिद्वार की कांवड़ तीर्थयात्रा भारत की सबसे बड़ी वार्षिक धार्मिक यात्रा बन गई है. जिसमें 2010 और 2011 के आयोजनों में अनुमानित 12 मिलियन श्रद्धालु शामिल हुए थे. श्रद्धालु दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, बिहार और झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश से आते हैं.
इस दौरान सरकार द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं. साथ ही दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-58) पर यातायात को डायवर्ट कर दिया जाता है.
अकोला की ये भव्य कांवड़ यात्रा अब गांधीग्राम की ओर रवाना हो चुकी है. रातभर चलने के बाद सोमवार सुबह राजराजेश्वर महाराज के मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा. आस्था के इस महासंगम में हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे और भोलेनाथ से अच्छी बारिश और किसानों के लिए खुशहाली की प्रार्थना करेंगे.
संजीव पिछले 40 वर्षों से लगातार बाबा बैजनाथ धाम की पैदल यात्रा करते आ रहे हैं. सावन के हर साल संजीव सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर बाबा धाम में भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. इस बार उन्होंने अपने यात्रा परिवार की 19 बेटियों के साथ शुरू की है.
सावन में बाबा बैजनाथ धाम की यात्रा पर आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है. झारखंड के गोड्डा निवासी संजीव कुमार अपने परिवार की 19 बेटियों के साथ 105 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पर निकले हैं. सभी बेटियां केसरिया वस्त्र पहनकर कांवड़ लेकर सुल्तानगंज से देवघर जा रही हैं.
सोशल मीडिया पर रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी का एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पुजारी भड़कते हुए लोगों को कांवड़ यात्रा का सही अर्थ समझाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोग भगवान के प्रांगण में आकर मां-बहन की गालियां देते हैं और खुद का कांवड़िया बताते हैं.
कन्नौज में डीजे को लेकर कांवड़ियों और पुलिस के बीच ऐसा विवाद हुआ कि मामला हाथापाई से लेकर माफी और कोतवाल के इस्तीफे के ऐलान तक पहुंच गया. शुक्रवार देर रात हरदोई के बिलग्राम से कांवड़ियों का जत्था कन्नौज के गौरीशंकर मंदिर में जल चढ़ाने जा रहा था. इसी दौरान शहर के अंदर डीजे ले जाने को लेकर पुलिस ने रोकने की कोशिश की. इसी बात पर कांवड़िए भड़क गए और पुलिस से धक्का-मुक्की शुरू हो गई. इसके बाद कांवड़ियों ने सड़क पर बैठकर धरना दिया और काफी देर तक हंगामा चलता रहा. मामला बढ़ता देख प्रशासन बैकफुट पर आया. एडीएम देवेंद्र सिंह ने कांवड़ियों से हाथ जोड़कर माफी मांगी....SHO को मौके पर ही सस्पेंड करने का एलान किया... जबकि कांवड़ियों से अभद्र व्यवहार के आरोपों के बीच कोतवाल जितेंद्र प्रताप सिंह ने भी मैदान में ही नौकरी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया.
कन्नौज में कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे को शहर के अंदर ले जाने से रोकने पर पुलिस और कांवड़ियों के बीच विवाद हो गया. कहासुनी के बाद धक्का-मुक्की हुई और कांवड़िए सड़क पर धरने पर बैठ गए. मामला बढ़ा तो प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कांवड़िया प्रतिनिधियों से माफी मांगी. कोतवाल जितेंद्र ने भी इस्तीफे का ऐलान किया. आखिरकार डीजे को आगे ले जाने की अनुमति मिली और विरोध खत्म हुआ.
झांसी में कांवड़ यात्रा के स्वागत के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हेलीकॉप्टर के काफी नीचे उड़ने से हवा का दबाव बढ़ा, जिससे कुछ राहगीर और बाइक सवार गिर पड़े।
सावन के पवित्र महीने में IIT कानपुर के छात्र-छात्राओं और प्रोफेसरों ने आस्था और परंपरा की अनोखी मिसाल पेश की. सरसैया घाट से पवित्र गंगाजल लेकर सभी छात्र अनुशासित तरीके से पैदल चलते हुए परमिट स्थित आनंदेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया.
सावन के तीसरे सोमवार पर देशभर के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ा है... वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ धाम को भव्य फूलों से सजाया गया है... बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है... वहीं झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में भी भक्तों का सैलाब देखने को मिल रहा है... कांवड़ियों की करीब 8 किलोमीटर लंबी कतार लगी है... हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से दोनों ही धाम गूंज रहे हैं.
सावन के महीने में अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है. अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग रामनगरी पहुंच चुके हैं. प्रशासन के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले श्रीरामलला के दर्शन करने वालों की संख्या करीब 10 प्रतिशत बढ़ी है. दूसरे सोमवार को करीब 6 लाख श्रद्धालु पहुंचे. बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, पानी, चिकित्सा और अन्य सुविधाओं के इंतजाम मजबूत किए हैं.
श्रावण मास में भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा है. अब तक 35 लाख से अधिक भक्त रामलला के दर्शन और शिवालयों में जलाभिषेक कर चुके हैं. भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने कड़े इंतजाम किए हैं.
सूरत के डिंडोली में सावन के धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर भोजपुरी गाने बजने और कलाकारों के डांस से विवाद खड़ा हो गया. श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने डांस के तरीके पर आपत्ति जताते हुए विरोध शुरू कर दिया. बढ़ते हंगामे को देखते हुए आयोजकों ने कार्यक्रम बंद करा दिया और हाथ जोड़कर लोगों से माफी मांगी. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद धार्मिक आयोजनों की मर्यादा को लेकर चर्चा शुरू हो गई.
हरिद्वार में कांवड़ मेला खत्म होने के बाद करीब 7 हजार मीट्रिक टन कूड़ा जमा हुआ है. इसे हटाने के लिए 1,000 अतिरिक्त कर्मचारी और 80 से ज्यादा वाहन सफाई में लगाए गए हैं.
हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता हरिद्वार... लेकिन कांवड़ यात्रा खत्म होते ही शहर में कूड़े का हाहाकार मच गया. करीब 4.8 करोड़ शिवभक्त 12 दिनों में हरिद्वार पहुंचे। गंगा में आस्था की डुबकी लगाई, गंगाजल लिया और कांवड़ यात्रा पूरी की. लेकिन इसके बाद घाटों, पार्किंग, मेला ग्राउंड और कांवड़ मार्गों पर 7 से 8 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा कचरा जमा हो गया.
मथुरा के कोसीकलां में चार बच्चों ने कांवड़ लेकर भगवान भोलेनाथ से स्कूल फीस माफ होने की मन्नत मांगी थी. बच्चों की यह बात सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद DM शैलेन्द्र कुमार सिंह ने संज्ञान लिया. चारों बच्चों को कलेक्ट्रेट बुलाकर स्कूल फीस माफ कराई गई. उन्हें ड्रेस, बैग, किताबें, जूते-मोजे समेत जरूरी सामान भी दिया गया. SDM छाता ने चारों बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी ली है.
प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से सावन के महीने में भगवान शिव के प्रति अनोखी भक्ति की मिसाल सामने आई है. शारीरिक चुनौतियों को पछाड़ते हुए दिव्यांग कमलेश कुमार अपनी ट्राई साइकिल और दृष्टिहीन राजेश कुमार पैदल ही कांवड़ में गंगाजल भरकर बनारस के शिवालय के लिए रवाना हुए हैं.
अलीगढ़ से कांवड़ यात्रा का एक बेहद अनोखा वीडियो सामने आया है, जिसमें एक कांवड़िया नुकीली लोहे की कीलों से बने प्लेटफॉर्म पर पेट के बल लेटकर यात्रा करता दिखाई दे रहा है. उसके साथ दूसरे प्लेटफॉर्म पर कांवड़ रखी है और एक व्यक्ति उसे आगे बढ़ाने में मदद करता नजर आता है. सोशल मीडिया पर इसे हठ कांवड़ या दंडौती कांवड़ बताया जा रहा है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
12 साल से 'अपनी सरकार' होने के बावजूद कांवड़ियों को सबसे बड़ा तोहफा हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश ही मिली है. सवाल है कि प्रशासन कांवड़ियों के लिए फूलों से ढका एक अलग कॉरिडोर ही क्यों नहीं बना देता?
बुर्के में कांवड़ लाने को लेकर चर्चा में आई तमन्ना मलिक की वीडियो रील पर सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणी करने वाले आरोपी फरमान को संभल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस कस्टडी में आरोपी ने हाथ जोड़कर और कान पकड़कर तमन्ना मलिक से माफी मांगी है.
UP के संभल में बुर्के में कांवड़ यात्रा करने वाली तमन्ना मलिक की रील पर कथित अश्लील टिप्पणी करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया. आरोपी ने कैमरे के सामने कान पकड़कर और हाथ जोड़कर माफी मांगी. एसपी ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी.
फरीदाबाद के 85 वर्षीय चंदर ने हरिद्वार से अपने पैतृक गांव सागरपुर तक करीब 250 किलोमीटर कांवड़ यात्रा पूरी की. चंदर पिछले 35 वर्षों से लगातार कांवड़ ला रहे हैं. उनका कहना है कि इस बार भी भोले बाबा का बुलावा आया, इसलिए यात्रा पर निकल पड़े. वीडियो में जानें पूरी कहानी.