नीट पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग कर रहे सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कांग्रेस की आलोचना की है. उनकी आलोचना कांग्रेस की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी के आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरना देने को लेकर हैं.
गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि कांग्रेस के 21 जुलाई के विरोध प्रदर्शन "गंभीरता" नहीं है और कांग्रेस नेताओं को इसके बजाय जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ शामिल होना चाहिए था.
गीतांजलि आंग्मो फिलहाल सोनम वांगचुक की लड़ाई को आगे बढ़ा रही हैं.
इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में आंग्मो ने कहा कि राजनेता अब वांगचुक और उनकी "प्रतिष्ठा" का "फायदा" रहे हैं, लेकिन जनता को अब और बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता.
पीएम आवास के बाहर कांग्रेस के आंदोलन में गंभीरता की कमी
वांगचुक को पिछले हफ़्ते जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया था, वे अस्पताल से ही अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं. गुरुवार को उनके अनशन का 26वां दिन है.
सोशल एंटरप्रेन्योर और शिक्षाविद आंग्मो ने कहा, "प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन में गंभीरता की कमी थी. जनता को अब और बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता. यह एक जागरूक भारत है. जो लोग ईमानदार नहीं हैं, उन्हें युवा बाहर कर देंगे."
गीतांजलि आंग्मो का ये बयान तब आए हैं, जब राहुल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री मोदी के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास के पास एक अभूतपूर्व धरना दिया था.
मंगलवार को वहां नाटकीय दृश्य देखने को मिला जब राहुल गांधी को पीएम आवास के सामने से पुलिस जबरन उठाकर और घसीटकर ले गई. इस अफरातफरी के दौरान उनकी नाक से खून भी बहने लगा. बाद में रात 9 बजे पुलिस ने उन्हें रिहा किया.
प्रधानमंत्री के दरवाज़े तक विरोध प्रदर्शन करके कांग्रेस ने इस आंदोलन में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है. जबकि कॉकरोच जनता पार्टी 28 जून से ही जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है.
गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि ये आंदोलन गैर राजनीतिक है.
आंग्मो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कॉकरोच जनता पार्टी के चलाए गए स्टूडेंट प्रोटेस्ट ने पॉलिटिकल क्लास को साफ़ मैसेज दिया है कि सिर्फ़ सिंबॉलिक कदम या मुंहजबानी बातें अब काफ़ी नहीं होंगी.
उन्होंने कहा, "आंदोलन ने हर पॉलिटिकल लीडर को दिखा दिया है कि उन्हें अपनी बात पर चलना होगा. वे अब और गैसलाइट नहीं कर सकते या झूठे नहीं हो सकते."
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में ब्रिटिश सरकार की स्कॉलरशिप पा चुकीं आंग्मो ने कहा कि यह आंदोलन किसी भी राजनीतिक गुट से जुड़ा हुआ नहीं है.
उन्होंने कहा, "हमारे लिए न तो कोई विपक्ष है और न ही कोई सरकार. हमारे लिए संसद ही सबसे बड़ी संस्था है. हम चाहते हैं कि संसद शिक्षा को एक बुनियादी मुद्दे के तौर पर देखे."
हालांकि आंग्मो ने कहा कि जो लोग बिना किसी राजनीतिक मकसद के आ रहे हैं, उनका विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए स्वागत है. उन्होंने कहा, "जो कोई भी अपने एजेंडे के साथ आएगा, वह पीछे छूट जाएगा क्योंकि यह आंदोलन ईमानदारी और पवित्रता से पैदा हुआ है."
बुधवार को वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के लिए अपनी मांगों की एक लिस्ट जारी की. एक्टिविस्ट ने सरकार से यह भरोसा मांगा कि 20 जुलाई के मार्च में शामिल होने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
हालांकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उनकी मुख्य मांग इसमें शामिल नहीं थी. इसे वांगचुक के रुख में नरमी के तौर पर देखा गया.
लेकिन वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह जो इस हफ्ते की शुरुआत में उनसे अस्पताल में मिलने आए थे, ने उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विचार किया जाएगा.