पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सीबीआई और ED को अधिक शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है, क्योंकि उस पर निगरानी की कमी होती है.
राजधानी दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को कांग्रेस नेता ने कहा, 'सीबीआई में अच्छे अधिकारी काम करते हैं, जिनमें से अधिकांश राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं. वह राज्य में एक अच्छा अधिकारी होता है. पर सवाल है कि केंद्र में पहुंचते ही वह खराब अधिकारी क्यों बन जाता है? निगरानी और नियंत्रण की कमी के कारण. पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन सकता है'.
हालांकि चिदंबरम ने इन एजेंसियों में आंतरिक सुधारों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं करते और संभवतः केंद्र के स्तर पर भी ऐसा हो सकता है.
कांग्रेस नेता का मानना है कि अगर उन्हें अधिक शक्तियां दी गईं, तो इस देश में पूरी तरह अराजकता फैल जाएगी. सीबीआई और ED अपनी वैध शक्तियों की सीमाओं को बहुत पहले पार कर चुके हैं. वे अपने आप में कानून बन गए हैं.
पूर्व गृह मंत्री ने सवाल किया कि IAS और IPS अधिकारी नेताओं के सामने खड़े होकर अपनी बात क्यों नहीं रख सकते. अधिक से अधिक उनका तबादला हो जाएगा, लेकिन नेता उन्हें 'सिर से अलग' तो नहीं कर सकते.
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस देश में सीवीसी पूरी तरह विफल हो चुका है. सीवीसी की ओर से मंजूर की गई कई चार्जशीट के मामलों में आरोपी लोग बरी हो गए या अदालतों ने चार्जशीट ही खारिज कर दी.