मैंने 4 फरवरी, 2026 को लोकसभा में जो देखा, वह अभूतपूर्व था. प्रधानमंत्री के भाषण से लगभग 15 मिनट पहले ही विपक्ष पोस्टर और बैनरों के साथ पूरी तरह तैयार नजर आ रहा था. डिंपल यादव समाजवादी पार्टी के सांसदों के साथ थीं, अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों के साथ और केसी वेणुगोपाल कांग्रेस सांसदों के साथ दिखाई दे रहे थे.
विपक्ष अपने मकसद को लेकर एकजुट था. छोटे-छोटे समूहों में नेता यह रणनीति बना रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी जब बोलने आएं, उस दौरान किस तरह का विरोध किया जाए.
मैं शाम 4:35 बजे लोकसभा की गैलरी में बैठ चुकी थी, ताकि वहां से सदन का पूरा दृश्य देख सकूं. मैंने 4:40 बजे समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव को अन्य सपा नेताओं अवधेश प्रसाद और धर्मेंद्र यादव के साथ सदन में आते देखा.
हर विपक्षी दल अपने-अपने पोस्टर और बैनर लेकर आया था. समाजवादी पार्टी के सांसदों के हाथों में अहिल्याबाई होलकर की तस्वीरें थीं.
टीएमसी सांसदों को कल्याण बनर्जी दिशा-निर्देश दे रहे थे. मैंने 4:50 बजे अभिषेक बनर्जी को महुआ मोइत्रा के साथ सदन में प्रवेश करते देखा. उन्होंने कल्याण बनर्जी से काफी देर बातचीत की, फिर सपा के अवधेश प्रसाद के पास गए और दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई. सदन के भीतर विपक्षी एकजुटता साफ तौर पर दिखाई दे रही थी.
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से ठीक 8 मिनट पहले, यानी 4:52 बजे, प्रियंका गांधी लोकसभा में आईं और शांतिपूर्वक अपनी सीट पर बैठ गईं.
केसी वेणुगोपाल कांग्रेस सांसदों के साथ रणनीति बनाने में जुटे थे. उद्देश्य साफ था- प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान हंगामा करना और पोस्टर-बैनर लहराना. घड़ी में शाम के 5 बजे और संध्या राय (मध्य प्रदेश के भिंड से बीजेपी सांसद) ने अध्यक्ष की कुर्सी संभाली.
कुछ ही सेकंड में कांग्रेस सांसद गेनीबेन नागाजी ठाकोर, वर्षा गायकवाड़ और प्रतिभा सुरेश धनोरकर वसीन, इमरान मसूद और अन्य विपक्षी सांसदों के साथ बड़े पोस्टर लेकर वेल में पहुंच गए.
स्थिति तब तेजी से बिगड़ गई जब सांसद वेल से आगे बढ़कर ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़ने लगे. बीजेपी नेता अश्विनी वैष्णव, अनुराग ठाकुर, किरेन रिजिजू और निशिकांत दुबे चौंक गए और सदन में अफरा-तफरी मच गई.
महज दो मिनट के भीतर, 5:02 बजे, अध्यक्ष संध्या राय ने लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी.
बीजेपी नेता हालात संभालने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान महिला सांसद अपनी सीटों की ओर बढ़ते हुए निशिकांत दुबे का नाम लेकर उन्हें पुकार रही थीं, जो बाहर की ओर जा रहे थे.
गेनीबेन नागाजी ठाकोर, वर्षा गायकवाड़ और प्रतिभा सुरेश धनोरकर उनके पीछे-पीछे चलती रहीं और उनसे मुड़कर देखने की मांग करती रहीं.
लोकसभा स्थगित होने के बावजूद मैं गैलरी में बैठी रही, क्योंकि माहौल बेहद तनावपूर्ण था. कुछ क्षणों के लिए ऐसा लगा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव हो सकता है.
शाम 5:06 बजे स्थिति को संभालने के लिए अश्विनी वैष्णव, पीयूष गोयल, किरेन रिजिजू और अनुराग ठाकुर विपक्षी नेताओं से बातचीत करने पहुंचे. अश्विनी वैष्णव ने दीपेंद्र हुड्डा के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें शांत करने की कोशिश भी की.
मैंने देखा कि विपक्ष के शीर्ष नेता- प्रियंका गांधी, अभिषेक बनर्जी, डिंपल यादव और सुप्रिया सुले शांतिपूर्वक पूरे घटनाक्रम को देख रहे थे. स्थगन की घोषणा के बाद वे सदन से बाहर की ओर बढ़ने लगे.
कुछ मिनटों के बाद स्थिति सामान्य हुई, विपक्षी सांसद पीछे हटे और बीजेपी सांसद भी मुड़कर सदन से बाहर निकलने लगे.