दुबई से इजरायल जा रही फ्लाइट को क्रैश होने से बचाने वाले कैप्टन स्मित मछार आ देश ही नहीं पूरी दुनिया के हीरो बने हुए हैं. कॉकपिट में जिस तरह की विकट परिस्थिति में उन्होंने अपनी सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए सैकड़ों लोगों की जान बचाई. ऐसा कर पाना सब के बस की बात नहीं है.
कॉकपिट के अंदर जो आपका सहयोगी है. एक तरफ वही आप पर हिंसक हमला कर रहा हो. ऐसे समय में खुद को हमले से संभालते हुए प्लेन कंट्रोल करना. फिर अलर्ट कोट भेजना और कॉकपिट का दरवाजा खोलना. बस कुछ सेकंड के अंदर खुद पर हमला होते हुए भी ये सारे फैसले ले पाना और होश नहीं खोना. अपने आप में बड़ी बात होती है.
पूरी दुनिया को अपनी बहादुरी का परिचय देने वाले कैप्टन स्मित मछार का व्यक्तित्व कैसा है? वह कामकाज के दौरान कैसे बिहेव करते हैं? उनकी शख्सियत कैसी है? इन सब चीजों के बारे में आज लोग जानना चाहते हैं. ऐसे में उनके साथ काम कर चुकीं, उनकी एक पूर्व सहयोगी ने कैप्टन स्मित मछार के बारे में कई जरूरी बातें बताईं
कैप्टन स्मित की पूर्व सहयोगी टीना गोस्वामी ने बताया कि हमलोग स्पाइस जेट में साथ काम करते थे. हमलोग डिस्पैच में मिला करते थे. वो हमेशा अच्छे से मिलते थे. वह बहुत ही विनम्र और डाउन टू अर्थ आदमी हैं. एक कैप्टन होने के बावजूद वह ग्राउंड स्टाफ और दूसरे क्रू मेंबर से काफी रेस्पेक्टफुली तरीके से मिलते और बात करते थे.
काफी विनम्र और मिलनसार हैं...
वह एक पायलट के तौर पर भी काफी अच्छे और मिलनसार इंसान हैं. काम के दौरान भी हमने ऐसा कभी नहीं देखा कि उन्होंने किसी को परेशान किया है या ऊंची आवाज में बात की हो. इस तरह के इमरजेंसी से निपटने के लिए हमारी हमेशा ट्रेनिंग होती है. हर छह महीने में हमें ऐसी ट्रेनिंग दी जाती है. उस वक्त भी हम ऐसी ही किसी सिचुएशन से निपट रहे होते हैं. हमें ट्रेनिंग ही इस बात की दी जाती है कि ऐसी विकट परिस्थिति से कैसे निपटा जाए.
फ्लाइट में हमेशा दो पायलट होते हैं. जब भी ऐसी सिचुएशन आती है तो एक पायलट एयरक्राफ्ट को कंट्रोल कर रहा होता है और दूसरा बाकी लोगों से बात करता है. हमेशा कॉकपिट में दो लोग होते हैं. लेकिन ऐसी सिचुएशन में जहां एक पायलट प्लेन क्रैश कराने की कोशिश करे, वह दूसरे पायलट पर अटैक भी कर रहा हो. तब दूसरे पायलट के सामने बहुत ही खतरनाक सिचुएशन आ सकती है. उसे हमले से भी बचना है और प्लेन को सेफ भी करना है.
फ्लाईदुबई की सिचुएशन नॉर्मल इमरजेंसी नहीं थी
जब प्लेन में ऐसी सिचुएशन आती है, तो रिस्क फैक्टर बहुत बढ़ जाता है. यह नॉर्मल इमरजेंसी नहीं था. आप समझिए कि जहां हम पायलट बैठते हैं, वो बहुत छोटी जगह होती है. ऐसे में एक तरफ आप पर अटैक हो रहा है. दूसरी तरफ आपको प्लेन भी संभालना है. उठकर कॉकपिट का दरवाजा भी खोलना और इमरजेंसी कोड भी भेजना है. इन सब के बीच हमले से खुद को बचाते रहना है. यह सिचुएशन आम नहीं हो सकती. यह काफी मुश्किल वक्त होता है. ऐसे में खासकर खुद को कंशियस रखना आसान नहीं होता.
उस समय वो सब करना सही तरीके से कर लेना आसान नहीं होता है. ऐसी स्थिति के लिए हमारी ट्रेनिंग जरूर होती है, लेकिन ऐसे वक्त में भी सही समय पर, सही फैसला लेते हुए, सही काम कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है. यानी सही समय पर सही ट्रेनिंग को सही तरीके से यूज करना बड़ी बात है. क्योंकि, जब आप पर हमला हो रहा हो तो कुछ भी चीज के लिए वक्त नहीं रह जाता है.
स्मित ने जो कुछ भी किया उससे हम सभी को गर्व है. पूरी पायलट कम्युनिटी को उन पर गर्व है. यह उनका एक बहुत बड़ा हिरोइक एक्ट है. उन्होंने 100 पर्सेंट देश को प्राउड किया है.
सही समय पर ट्रेनिंग का सही इस्तेमाल किया
एक इंसान की भी जान बचाना बहुत बड़ी बात है. मुझे ये सोचकर भी डर लग रहा है कि आगे क्या होता. लेकिन, ऐसे टाइम पर एक पायलट के तौर पर आपने जो कुछ भी इतने साल में सीखा उसे सही तरीके से इस्तेमाल करना बहुत बड़ी बात है. क्योंकि,एक तरफ आपका जख्म अलग है, प्लेन को कंट्रोल करना भी एक अलग बात है और यात्रियों की जान बचाना भी अलग है. सिर्फ ऐसे समय पर सही फैसला ही ले पाना कि कब क्या करना है. यही बहुत बड़ी बात है और स्मित ने यही किया. सही समय पर सही फैसला लेते रहे.
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उनके बारे में कुछ भी नेगेटिव नहीं देखा है और न सुना है. वह बहुत ही अच्छे इंसान है. उन्होंने प्लेन में मौजूद सभी लोगों को एक परिवार की तरह देखा और उन्हें लगा कि मुझे बस सब को बचाना है. प्लेन में जो भी यात्री थे, उन्हें भी उनके देश में सही ट्रेनिंग मिली है. क्योंकि, जैसे कॉकपिट का दरवाजा खुला और यात्री अंदर आए. उन्होंने प्लेन को तब तक कंट्रोल किया, जब तक दूसरे पायलट नहीं आ गए. वो प्लंबर थे, उन्होंने वीडियो में देखकर प्लेन को थोड़ा बहुत कंट्रोल करना सीखा था. ऐसा कर पाना बहुत बड़ी बात होती है.