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'आंदोलन खत्म, लड़ाई नहीं', अभिजीत दिपके ने बताई CJP की अगली रणनीति

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ 36 दिन लंबा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन भले खत्म हो गया हो, लेकिन संगठन ने साफ कर दिया है कि उसकी लड़ाई अभी जारी रहेगी. सीजेपी का कहना है कि अब उसका फोकस शिक्षा सुधार, युवाओं के मुद्दों और आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने पर होगा.

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CJP founder Abhijeet Dipke. (File Photo: PTI)
CJP founder Abhijeet Dipke. (File Photo: PTI)

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भले ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना 36 दिनों तक चला देशव्यापी आंदोलन खत्म कर दिया हो, लेकिन संगठन के नेताओं का कहना है कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक बड़े मिशन की शुरुआत है. अब संगठन का ध्यान शिक्षा सुधारों और युवाओं के विभिन्न मुद्दों को जमीनी स्तर तक ले जाने पर हे.

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि संगठन जल्द ही अपनी अगली रणनीति की घोषणा करेगा. उन्होंने कहा, 'आंदोलन कल ही खत्म हुआ है, हमें थोड़ा समय दीजिए. जल्द ही आगे की योजना बताएंगे.' पंजाब में कथित पेपर लीक के मामले पर अभिजीत दिपके ने कहा, 'हम इस मुद्दे पर जवाब देंगे और फिलहाल इसकी योजना बनाई जा रही है.' सरकार के साथ बातचीत पर उन्होंने कहा, 'छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर चर्चा चल रही है. किसी भी छात्र के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं होना चाहिए.'

'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजिल नहीं'

केंद्र सरकार द्वारा सीजेपी की प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद संगठन ने शनिवार को आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया था. हालांकि, सीजेपी के सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी मंजिल नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष की शुरुआत है. अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'आंदोलन खत्म करने का मतलब यह नहीं कि लड़ाई खत्म हो गई है. यह सिर्फ शुरुआत है. कॉकरोच जनता पार्टी को अभी बहुत लंबा सफर तय करना है.'

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कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग भी की थी. अभिजीत दिपके ने कहा था, 'धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए.' हालांकि, केंद्र सरकार ने मृतक छात्रों के परिवारों को संभव अधिकतम मुआवजा देने पर सहमति जताई है. दिपके ने 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों का भी मुद्दा उठाया था. उन्होंने मांग की कि इस दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी उचित कदम उठाए जाएं.

शिक्षा सुधार पर रहेगा CJP का फोकस

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर पर धरना समाप्त होने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा था कि संगठन आगे भी युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा और शिक्षा, शासन व्यवस्था में सुधार के लिए अभियान चलाएगा. उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'आंदोलन जारी रहेगा. हमारा लक्ष्य युवाओं के मुद्दों को उठाना और शिक्षा व शासन व्यवस्था में सुधार लाना है.' सौरव दास ने स्पष्ट किया कि फिलहाल संगठन का चुनावी राजनीति में उतरने का कोई तत्काल इरादा नहीं है.

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उन्होंने कहा, 'देश में 750-800 राजनीतिक दल हैं, लेकिन कोई भी युवाओं की आकांक्षाओं को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रहा है. हमारा लक्ष्य इस आंदोलन को गांव-गांव और जमीनी स्तर तक ले जाना है, ताकि सत्ता में कोई भी दल हो, उसे युवाओं की मांगों पर काम करना पड़े.'

भविष्य में राजनीति में आने से इनकार नहीं 

हालांकि सीजेपी ने फिलहाल अपना ध्यान आंदोलन के विस्तार पर केंद्रित बताया है, लेकिन संगठन के नेता आशुतोष रांका ने भविष्य में राजनीति में आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया. आजतक ने जब उनसे पूछा कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी भविष्य में राजनीतिक दल बन सकती है, तो उन्होंने कहा, 'सार्वजनिक जीवन और राजनीति में मैंने एक बात सीखी है- कभी ना मत कहिए.' हालांकि, उन्होंने दोहराया कि इस समय उनकी प्राथमिकता देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार है. रांका ने कहा, 'यह खत्म नहीं हुआ है. यह तो बस शुरुआत है. जब तक इस देश की शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी, हम रुकने वाले नहीं हैं. यह हमारा वादा है.'

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