महाराष्ट्र की राजनीति में ठाणे एक बार फिर चर्चा में है. शिवसेना यूबीटी नेता प्रदीप पूर्णेकर की हत्या के बाद उनके परिवार ने एकनाथ शिंदे के करीबी माने जाने वाले लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. परिवार का आरोप है कि पूर्व मेयर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे इस हत्या की साजिश में शामिल थे. परिवार ने पुलिस के सामने सबूत रखने का दावा करते हुए दोनों की गिरफ्तारी की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों की अभी जांच जारी है और मीनाक्षी शिंदे ने हत्या से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है. इस मामले ने तब राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब प्रदीप पूर्णेकर के बेटे राम पूर्णेकर ने न्याय की मांग करते हुए एकनाथ शिंदे के ठाणे स्थित आवास शुभ-दीप निवास के सामने आंदोलन करने की कोशिश की. पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और ऑटो रिक्शा से नौपाडा पुलिस स्टेशन ले गई. इसके बाद परिवार और पूर्णेकर के समर्थकों का गुस्सा बढ़ गया.
राम पूर्णेकर को हिरासत में लिए जाने के बाद परिवार और समर्थकों ने नौपाडा पुलिस स्टेशन में धरना दिया. उनकी मांग थी कि मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे को गिरफ्तार किया जाए. करीब सात घंटे तक प्रदर्शन चला, लेकिन जब परिवार को पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखी, तो प्रदर्शनकारी घोड़बंदर रोड की तरफ पहुंच गए. यहां समर्थकों ने हाईवे जाम कर दिया. इसके चलते सड़क पर घंटों तक यातायात प्रभावित हुआ. प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाए और नारेबाजी करते हुए मीनाक्षी शिंदे की गिरफ्तारी की मांग की. परिवार का कहना है कि जब उन्होंने पुलिस के सामने सबूत रखे हैं, तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है.
शिंदे गुट के नेताओं ने बताया राजनीतिक षड्यंत्र
प्रदर्शन के बाद एकनाथ शिंदे के समर्थक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी. सांसद नरेश म्हस्के और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पूरे घटनाक्रम को ठाणे और एकनाथ शिंदे को बदनाम करने की कोशिश बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले के पीछे राजनीतिक षड्यंत्र हो सकता है. सांसद नरेश म्हस्के ने विरोधी दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ठाणे के बाहर से लोग आकर इस मुद्दे पर राजनीति करेंगे, तो वे ठाणे से वापस नहीं जाएंगे. उनके बयान से साफ है कि हत्या के मामले को लेकर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं.
वहीं, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि पूर्णेकर परिवार के पास जो भी सबूत हैं, उन्हें विशेष जांच दल यानी एसआईटी को सौंपना चाहिए. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस अपना काम करेगी और हत्यारों को सजा दिलाने के लिए वे पूर्णेकर परिवार के साथ हैं. हालांकि, परिवार ने नेताओं के इन बयानों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यदि एकनाथ शिंदे और उनके सहयोगी न्याय दिलाने के लिए साथ हैं, तो फिर मीनाक्षी शिंदे को बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है. परिवार ने इस सवाल के जरिए नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.
मीनाक्षी शिंदे को एकनाथ शिंदे का करीबी माना जाता है. उनका परिवार मूल रूप से कर्नाटक का रहने वाला है, लेकिन कई वर्षों से ठाणे में रह रहा है. वह मानपाड़ा इलाके के माजीवाड़ा से वर्ष 2007 से लगातार पार्षद चुनी जाती रही हैं. वर्ष 2017 से 2019 तक उन्होंने ठाणे की मेयर के रूप में भी काम किया. वर्ष 2022 में जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में बगावत की थी, तब मीनाक्षी शिंदे उनके साथ खड़ी रही थीं. इसके बाद उन्हें महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया. वर्ष 2026 के ठाणे नगर निगम चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की. उनके पति राजेंद्र शिंदे शिवसेना में विभाग प्रमुख के तौर पर काम कर रहे हैं.
पूर्णेकर परिवार और शिंदे परिवार के बीच राजनीतिक टकराव की एक वजह वर्ष 2026 के नगर निगम चुनाव को भी बताया जा रहा है. माजीवाड़ा के प्रभाग संख्या 3 में मीनाक्षी शिंदे के खिलाफ शहर विकास आघाड़ी ने उम्मीदवार उतारा था. इसी प्रभाग से प्रदीप पूर्णेकर की पत्नी विजेता पूर्णेकर भी चुनाव मैदान में थीं. एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद प्रदीप पूर्णेकर ठाकरे गुट के साथ सक्रिय नजर आते थे. चुनाव में चुनौती मिलने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने की बात सामने आई थी. मीनाक्षी शिंदे ने चुनाव में 4,898 वोटों से जीत हासिल की, लेकिन परिवारों के बीच राजनीतिक टकराव खत्म नहीं हुआ.
प्रदीप पूर्णेकर की हत्या 29 सितंबर 2026 की रात करीब साढ़े नौ बजे हुई थी. वह मानपाड़ा के मनोरमा नगर स्थित अपने ऑफिस में बैठे थे. उसी दौरान उनके दोस्त प्रकाश उर्फ पप्प्या शिंदे भी उनसे मिलने पहुंचे थे. कुछ देर बाद तीन से चार लोग ऑफिस में घुसे और अंधाधुंध फायरिंग कर प्रदीप पूर्णेकर की हत्या कर दी. इस वारदात के बाद से ही उनका परिवार और समर्थक मीनाक्षी शिंदे तथा उनके पति पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाते रहे हैं.
हत्या के मामले में पांच लोग गिरफ्तार
हत्या के बाद पुलिस अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें प्रकाश उर्फ पप्प्या शिंदे, निखिल यादव, अमित सिंह, नितेश पवार और संतोष कनोजिया के नाम शामिल हैं. पूर्णेकर परिवार ने प्रकाश उर्फ पप्प्या शिंदे पर हत्यारों को रास्ता दिखाने और उनकी मदद करने का आरोप लगाया है. राम पूर्णेकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरें और वीडियो पेश किए. उनका दावा है कि हत्या से करीब 45 मिनट पहले मीनाक्षी शिंदे के पति राजेंद्र शिंदे ने हत्यारों से मुलाकात की थी. परिवार इन फुटेज को महत्वपूर्ण सबूत बता रहा है और पुलिस पर कार्रवाई में देरी करने का आरोप लगा रहा है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है.
मामले की जांच कर रही एसआईटी राजेंद्र शिंदे को अब तक सात बार पूछताछ के लिए बुला चुकी है. बताया गया है कि उनसे करीब 50 घंटे से ज्यादा समय तक सवाल-जवाब किए गए हैं. इसके अलावा, मीनाक्षी शिंदे को भी एसआईटी ने पूछताछ के लिए बुलाया था. उनसे करीब सात घंटे तक सवाल किए गए. पूछताछ के बाद एसआईटी कार्यालय से बाहर निकलते समय मीनाक्षी शिंदे ने प्रदीप पूर्णेकर की हत्या से अपना कोई संबंध होने से इनकार किया. फिलहाल इस मामले में परिवार की गिरफ्तारी की मांग, नेताओं के राजनीतिक आरोप और एसआईटी की जांच एक साथ चल रही है. सबसे अहम सवाल यही है कि परिवार की ओर से पेश किए गए बताए जा रहे सबूतों की जांच में क्या सामने आता है और हत्या की साजिश को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं.