तीन महीने से जंगल के कोर जोन के दरवाजे बंद थे. अब जैसे ही 1 अक्टूबर को ये दरवाजे खुले, ताडोबा के जंगल में फिर पर्यटकों की चहल-पहल शुरू हो गई. कहीं पूजा हुई, कहीं रिबन काटा गया और फिर फूलों से स्वागत के बाद जिप्सियां जंगल सफारी के लिए रवाना हुईं. महाराष्ट्र के चंद्रपुर स्थित ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सीजन का आगाज होते ही देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला.
मानसून के दौरान ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के कोर जोन में पर्यटन बंद रहता है. हालांकि इस दौरान बफर जोन में सफारी जारी रहती है. लेकिन कोर जंगल में बाघों और दूसरे वन्यजीवों को करीब से देखने का इंतजार पर्यटकों को रहता है. आखिरकार 1 अक्टूबर को यह इंतजार खत्म हुआ.
मोहुर्ली सफारी गेट पर विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रिबन काटकर पर्यटन सीजन की शुरुआत की गई. इसके बाद पर्यटकों को फूल देकर उनका स्वागत किया गया और जिप्सियों को जंगल सफारी के लिए रवाना किया गया. पहले ही दिन पर्यटकों के चेहरों पर जंगल लौटने की खुशी साफ दिखाई दी. ताडोबा प्रशासन के अधिकारी और गाइड भी पर्यटकों के उत्साह से उत्साहित नजर आए.

पहले दिन सफारी करने पहुंचे एक पर्यटक ने अपना अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी उनकी पहली सफारी 1 अक्टूबर को तय थी. जंगल से बाहर निकलते समय उन्हें कोलार वाली नाम की बाघिन दिखाई दी.
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बाघिन बिल्कुल सामने से होकर गुजरी. उन्होंने कहा कि जंगल में 1 अक्टूबर के आसपास दिखाई देने वाली हरियाली को देखने का अनुभव भी अलग होता है. यानी पर्यटन सीजन के पहले ही दिन ताडोबा ने पर्यटकों को वह अनुभव दे दिया, जिसके लिए वे यहां पहुंचते हैं- घना जंगल, हरियाली और अचानक सामने आ जाने वाला बाघ.

इस टाइगर रिजर्व की पहचान सिर्फ बाघों तक सीमित नहीं है. घने जंगल, बांस के झुरमुट, घास के मैदान, तालाब और जलस्रोत यहां के प्राकृतिक परिदृश्य हैं. ताडोबा में बाघों के अलावा तेंदुए, भालू, गौर, जंगली कुत्ते, सांभर, चीतल और नीलगाय समेत कई वन्यजीव हैं. अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी भी है. सुबह की हल्की धूप में जंगल के बीच से गुजरती जिप्सी, पक्षियों की आवाज और आसपास घूमते वन्यजीव पर्यटकों के लिए सफारी को अलग अनुभव बनाते हैं.

91 देशों से पहुंचे 20 हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक
ताडोबा की लोकप्रियता सिर्फ देश तक सीमित नहीं है. पर्यटन से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में कुल 3 लाख 89 हजार 700 पर्यटक पहुंचे. इनमें 91 देशों के 20 हजार 393 विदेशी पर्यटक भी शामिल थे. बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी बताती है कि ताडोबा भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव पर्यटन के नक्शे पर भी अपनी पहचान बना चुका है. देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक यहां खास तौर पर बाघों को देखने और जंगल का अनुभव लेने पहुंचते हैं.

गाइड और जिप्सी चालकों को भी ट्रेनिंग
नए पर्यटन सीजन को देखते हुए ताडोबा प्रशासन ने पर्यटकों की सुविधाओं और जंगल सफारी के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थाएं की हैं. गाइड और जिप्सी चालकों को पर्यटकों के साथ व्यवहार और आतिथ्य सत्कार को लेकर ट्रेनिंग दी गई है.
ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के उपसंचालक आनंद रेड्डी ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी कोर एरिया शुरू किया गया है. मोहुर्ली में सीनियर गाइड के साथ सफारी शुरू हुई है और पहले दिन पर्यटकों के चेहरों पर उत्साह दिखाई दिया. सफारी का मकसद केवल पर्यटकों को बाघ दिखाना नहीं है. गाइड के जरिए उन्हें जंगल, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक पर्यावरण के बारे में भी जानकारी दी जाती है.

मानसून के तीन महीने के विराम के बाद ताडोबा का कोर जंगल एक बार फिर पर्यटकों के लिए खुल चुका है. पहले दिन ही बाघिन के दर्शन ने सफारी का रोमांच बढ़ा दिया. अब आने वाले महीनों में ताडोबा के जंगल में जिप्सियों की आवाजाही बढ़ेगी और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक बाघों के साथ-साथ तेंदुए, भालू, गौर और दूसरे वन्यजीवों को देखने के लिए जंगल का रुख करेंगे. एक तरफ बाघों की दहाड़ और दूसरी तरफ हरियाली से भरा जंगल. यही ताडोबा का वह आकर्षण है, जो हर पर्यटन सीजन में वन्यजीव प्रेमियों को चंद्रपुर खींच लाता है.