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मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक पर भारी भूस्खलन, 60-60 टन की चट्टानों ने मचाई तबाही

पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट पर भारी बारिश के कारण सोमवार तड़के भूस्खलन हुआ. इसकी वजह से पहाड़ी से गिरे बड़े पत्थरों से टनल के निकास द्वार को नुकसान पहुंचा. MSRDC के मुताबिक, सुरक्षा उपाय अधूरे थे क्योंकि पत्थरों को रोकने के इंतजाम सिर्फ टनल के ऊपर 10 मीटर तक किए गए थे, जबकि भूस्खलन टनल के 150-200 मीटर ऊपर हुआ था.

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भूस्खलन से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. (Photo- ITGD)
भूस्खलन से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. (Photo- ITGD)

पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बना 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट का महज दो महीने पहले ही इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ अजूबा बताकर उद्घाटन किया गया था. लेकिन सोमवार तड़के इस पर पहाड़ी का ऊपरी हिस्सा गिर गया. पहाड़ी से गिरे पत्थरों से पुणे से मुंबई की तरफ आने वाली टनल के निकास द्वार को काफी नुकसान पहुंचा है.

सोमवार तड़के करीब 3 बजे एक्सप्रेसवे कंट्रोल रूम को भूस्खलन की सूचना मिली. राहत की बात ये रही कि उस समय यातायात बेहद कम था, जिसके चलते किसी भी गाड़ी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. हादसे के तुरंत बाद इस रूट के ट्रैफिक को पुराने एक्सप्रेसवे की तरफ डाइवर्ट कर दिया गया.

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के मुताबिक, इस क्षेत्र में रविवार शाम 4 बजे से सोमवार शाम 4 बजे के बीच लगभग 760 मिमी रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है. 

(Photo- ITGD)

क्यों हुआ हादसा?

मूसलाधार बारिश की वजह से पहाड़ी पर बहने वाले पानी ने अपना प्राकृतिक रास्ता बदल लिया और वो सीधे मिसिंग लिंक एक्सप्रेसवे की टनल के ऊपर बहने लगा. इस जलभराव और दबाव के कारण पहाड़ी के ऊपर से करीब 60-60 टन वजनी चार बड़े पत्थर नीचे आ गिरे. ये भारी पत्थर टनल के मुहाने पर बनाई गए डेकोरेटिव स्ट्रक्चर पर गिरे, जिससे वो पूरी तरह ढह गई.

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खंडाला घाट के जाम से मुक्ति के लिए बना था ये रूट

दरअसल ये मिसिंग लिंक 6,695 करोड़ रुपये की लागत वाली मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे परियोजना का हिस्सा है. इसे खंडाला घाट खंड के खतरनाक मोड़ों और वहां लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए बनाया गया था. पश्चिमी घाट में 'घाट खंड' का मतलब उन घुमावदार पहाड़ी रास्तों से होता है, जो कोंकण के मैदानी इलाकों को ऊंचे दक्कन के पठार से जोड़ते हैं.

खोपोली से सिंहगढ़ संस्थान के बीच 19.8 किलोमीटर लंबे खंडाला घाट वाले हिस्से को बायपास करने के लिए इस 13.3 किलोमीटर लंबे मिसिंग लिंक का निर्माण किया गया है, ताकि सालों से हो रहे हादसों और जाम को रोका जा सके.

टनल से सिर्फ 10 मीटर ऊपर तक ही किए गए थे सुरक्षा उपाय

MSRDC के संयुक्त प्रबंध निदेशक राजेश पाटिल ने बताया कि भूस्खलन से टनल के मेन स्ट्रक्चर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. हालांकि, ये हादसा पहाड़ी पर पत्थरों को रोकने के अधूरे उपायों की वजह से हुआ है.

अधिकारियों ने बताया, 'टनल के ठीक ऊपर करीब 120 मीटर का ओवर बर्डन है. हमने IIT बॉम्बे से इस मामले पर सलाह ली थी. उनके सुझाव के आधार पर हमने टनल के ऊपरी हिस्से से सिर्फ 10 मीटर की ऊंचाई तक ही पत्थरों को गिरने से रोकने के इंतजाम किए थे. लेकिन, ये भूस्खलन टनल के शीर्ष से करीब 150 से 200 मीटर ऊपर से हुआ है, जिसके कारण इतने भारी पत्थर नीचे आ गए.'

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बहाली कार्य जारी, अब पूरी पहाड़ी पर होगी सुरक्षा

घटना के 12 घंटे बाद भी पहाड़ी से ढीले पत्थरों को नीचे गिराने और हटाने का काम जारी रहा. टनल के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा झरना बन जाने के कारण इस लेन को तुरंत शुरू करना मुमकिन नहीं है. सोमवार शाम 6 बजे तक पुणे-मुंबई मार्ग पर यातायात बहाल नहीं हो सका था और मलबे से भरे ट्रकों को हटाने का काम चल रहा था.

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लगातार हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं की वजह से अधिकारी स्थिति का जायजा लेने के लिए ड्रोन भी नहीं उड़ा पा रहे हैं. MSRDC अधिकारियों का कहना है कि अब इस तरह के हादसों को दोबारा रोकने के लिए पूरी पहाड़ी पर पत्थरों को रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे.

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