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महाराष्ट्र में मॉनसून ने खोली सिस्टम की पोल! तीन दिन में पांच हादसे, बच्चे समेत 5 लोगों की मौत

हर साल मॉनसून में मुंबई की यही तस्वीर सामने आती है, लेकिन इस बार शुरुआती कुछ दिनों में ही जिस तरह से प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है, उसने आम जनता की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. नेताओं की बयानबाजी और जांच के आदेशों के बीच मुंबईकर अब भी सिर्फ अपनी किस्मत के भरोसे सड़कों पर निकलने को मजबूर हैं.

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मुंबई और आसपास के उपमहानगरों में भारी बारिश का सिलसिला जारी है (File Photo- PTI)
मुंबई और आसपास के उपमहानगरों में भारी बारिश का सिलसिला जारी है (File Photo- PTI)

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उससे सटे उपनगरों में मॉनसून की दस्तक के साथ ही हादसों का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ है, जिसने पूरे प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है. पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश मुंबईकरों के लिए आफत बन चुकी है. कहीं 'मौत के मैनहोल' खुले पड़े हैं, कहीं जलजमाव के बीच बिजली का करंट दौड़ रहा है, तो कहीं पुराने पेड़ बच्चों के लिए काल बन रहे हैं.

ताजा मामला मुंबई के साकिनाका इलाके का है, जहां गुरुवार दोपहर खैरानी रोड पर एक खुले मैनहोल में गिरने से 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई. मृतक की पहचान यादव नगर के रहने वाले असलम इसाक शेख के रूप में हुई है. यहां सन्मान होटल और एस जे स्टूडियो के पास ड्रेनेज सिस्टम के रखरखाव का काम चल रहा था और मैनहोल का ढक्कन खुला हुआ था.

इसी दौरान असलम शेख नाम के बुजुर्ग वहां से पैदल गुजर रहे थे. वे मोबाइल पर बात करने में मग्न थे और उनका ध्यान सड़क पर खुले इस मैनहोल पर नहीं गया. उनका संतुलन बिगड़ा, वो सीधे मैनहोल के अंदर गिर गए औऱ तेज बहाव में बह गया. यह पूरी घटना पास के CCTV में कैद हो गई. कर्मचारियों ने तुरंत सीढ़ी डालकर उन्हें ढूंढने की कोशिश की, लेकिन केवल उनकी चप्पल और छाता ही हाथ लगे. 

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बाद में दमकल विभाग के एक जवान ने ब्रीदिंग अपैरेटस की मदद से अंडरग्राउंड लाइन में उतरकर असलम को बाहर निकाला. उन्हें राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस घटना पर महाराष्ट्र विधानसभा में भी भारी हंगामा हुआ और स्पीकर राहुल नार्वेकर ने इसे 'गैर-इरादतन हत्या' करार देते हुए सरकार से जवाब मांगा है. इस मामले में वार्ड ऑफिसर समेत BMC के अधिकारी सस्पेंड किए गए हैं. 

मुंब्रा में भी बारिश बनी जानलेवा, लड़की की मौत

गुरुवार 2 जुलाई को ही ठाणे के मुंब्रा इलाके में बारिश के पानी में उतरे करंट की चपेट में आने से 17 वर्षीय आलिया की मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए. जानकारी के मुताबिक, मुंब्रा स्थित यास्मीन पार्क की बी-विंग में रहने वाली आलिया किसी काम से इमारत के बाहर निकली थी. इसी दौरान वह बारिश के पानी में उतरे करंट की चपेट में आ गई, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई.

परिजन और स्थानीय लोग उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी और स्थानीय नगरसेवक मौके पर पहुंचे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है.

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स्थानीय नगरसेवक शोएब डोंगरे ने घटना की जानकारी देते हुए प्रशासन से इलाके में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है.

1 जुलाई: मूसलाधार बारिश, जलभराव और करंट का खतरा

महाराष्ट्र के डोंबिवली के हनुमान नगर इलाके में बुधवार को भारी बारिश के दौरान 42 वर्षीय महिला की सड़क पर पड़े खुले बिजली के तार की चपेट में से मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक शशी राहुल चक्र (42) बुधवार को अपने बच्चों के लिए नाश्ता लेने घर से निकली थीं, उसी दौरान भारी बारिश के बीच एक बिजली की लाइन सड़क पर गिरी हुई थी. बारिश के पानी में करंट फैल जाने से वह उसकी चपेट में आ गईं और उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा. 

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन करंट इतना तेज था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई. मृतका अपने पीछे पति राहुल चक्र और दो छोटे बच्चों को छोड़ गई हैं. घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और बिजली सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है. फिलहाल इस मामले की जांच टिलकनगर पुलिस कर रही है.

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इसी दिन नवी मुंबई के नेरुल एलपी ब्रिज के पास जलभराव के बीच एक बड़ा हादसा हुआ. सड़क पर भरे पानी से गुजर रही 17 वर्षीय शुभांगी बलखंडे और 19 वर्षीय उज्ज्वला वाघ को अचानक करंट लग गया. दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई. प्राथमिक जांच में आशंका जताई गई कि बारिश के दौरान जमीन के नीचे की बिजली की केबल क्षतिग्रस्त होने से पानी में करंट फैल गया था.

इसी दिन ठाणे के उल्हासनगर के जीजामाता इलाके में बाढ़ का पानी घरों के भीतर घुस गया. इस दौरान एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला कई घंटों तक अपने घर के भीतर ही पानी के बीच फंसी रहीं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें दमकल विभाग के कर्मचारी उस बुजुर्ग महिला को अपनी गोद में उठाकर घुटने तक भरे पानी से सुरक्षित बाहर निकालते नजर आए.

30 जून: स्कूल बस पर गिरा पेड़, 11 वर्षीय छात्र की मौत

मंगलवार (30 जून) की दोपहर को मुंबई के चेंबूर इलाके में भी एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ. एक प्राइवेट स्कूल के 13 छात्रों को लेकर घर छोड़ रही एक चलती स्कूल बस पर दोपहर करीब 2:58 बजे रोड नंबर 11 के पास एक विशाल और पुराना पीपल का पेड़ अचानक जड़ से उखड़कर गिर गया. पेड़ का वजन इतना ज्यादा था कि बस का एक हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और बच्चे अंदर ही फंस गए.

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स्थानीय लोगों, ड्राइवर और दमकल विभाग ने मिलकर बच्चों को बाहर निकाला. इस हादसे में 5 छात्र (उम्र 4 से 12 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए. इनमें से 11 वर्षीय छात्र विहान श्रीवास्तव ने इलाज के दौरान जेन अस्पताल में दम तोड़ दिया. बीएमसी के मुताबिक यह पेड़ करीब 60 से 70 साल पुराना था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि हाल ही में सड़क के किनारे हुए सीमेंट कंक्रीट और ड्रेनेज के काम की वजह से पेड़ की जड़ें कमजोर हो गई थीं, जिससे यह हादसा हुआ. मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.

24 जून: मेयर के सामने ही नाले में गिरा बीएमसी सुपरवाइजर

मुंबई में मानसून की शुरुआत के साथ ही 24 जून को एक ऐसा वाकया हुआ जिसने बीएमसी की पोल खोल दी. मुंबई में रातभर हुई भारी बारिश के बाद नवनियुक्त मेयर रितु तावड़े किंग्स सर्कल के गांधी मार्केट इलाके में जलजमाव का जायजा लेने पहुंची थीं. मेयर जहां खड़ी थीं, उससे महज कुछ फीट की दूरी पर बीएमसी का ही एक सुपरवाइजर कचरा निकालने के लिए खोले गए नाले में अचानक अनियंत्रित होकर गिर गया. 

गनीमत रही कि उसे तुरंत बाहर निकाल लिया गया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, जिसके बाद विपक्ष ने बीएमसी को आड़े हाथों लिया. इस पर भड़कीं मेयर ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि कोई भी मैनहोल या नाला खुला मिला, तो संबंधित वार्ड अधिकारी को सस्पेंड कर दिया जाएगा.

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लगातार हादसों ने खड़े किए बड़े सवाल

एक हफ्ते के भीतर एक बच्चे और एक बुजुर्ग की मौत, दो युवतियों को करंट लगना और बीएमसी कर्मचारी का खुले नाले में गिरना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर मॉनसून से पहले किए जाने वाले सुरक्षा इंतजाम जमीन पर कितने प्रभावी हैं. जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हर बारिश मुंबईवासियों के लिए एक नया खतरा बनकर सामने आती रहेगी.

(विक्रांत चौहान के इनपुट के साथ)

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