महाराष्ट्र के विदर्भ में 50 दिनों से बारिश न होने के कारण सोयाबीन की फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है. अकोला और बुलढाणा के खेतों में हालात का जायजा लेने के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किसानों की समस्याएं सुनीं और उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी दशहरा और दिवाली काली नहीं होने देगी.
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों पर इस साल बड़ा संकट आया है, इसलिए सरकार भी बड़ी मदद करेगी और आगामी दशहरा व दिवाली के त्योहार को फीका नहीं पड़ने देगी.
फलियों में नहीं भरे दाने
विदर्भ में सोयाबीन किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. अकोला और बुलढाणा जिले में बारिश में आए भारी अंतराल ने खरीफ की प्रमुख फसलों को गहरा नुकसान पहुंचाया है. खेतों में सोयाबीन के पौधे तो खड़े दिख रहे हैं, लेकिन उनमें लगी फलियों में दाने नहीं आ रहे हैं. इससे पैदावार में भारी गिरावट का अंदेशा बन गया है. जमीनी हकीकत को खुद देखने के लिए उपमुख्यमंत्री सीधे किसानों के बीच खेतों तक पहुंचे.
संकट बड़ा है तो मदद भी बड़ी होगी
उपमुख्यमंत्री ने खेतों का निरीक्षण करने के बाद 'आज तक' से विशेष बातचीत की. जब उनसे पूछा गया कि पिछले साल की तुलना में इस बार का संकट कहीं ज्यादा बड़ा है तो सरकार क्या कदम उठाएगी. इस पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि इस साल किसानों पर गंभीर संकट है और जब संकट बड़ा है तो सरकार भी बड़ी मदद पहुंचाएगी. वो खुद किसानों के बांध पर जाकर उनकी स्थिति देख रहे हैं और सरकार पूरी मजबूती से किसानों के साथ खड़ी है.
'दशहरा-दिवाली पर किसानों को राहत देगी सरकार'
आगामी त्योहारों और किसानों के आर्थिक संकट के सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसानों की दशहरा और दिवाली को काली नहीं होने दिया जाएगा. सरकार त्योहारों से पहले किसानों को राहत देने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी. सोयाबीन की इस फसल के लिए किसानों ने बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी पर लाखों रुपये खर्च किए हैं. कई किसानों ने बैंकों से भारी कर्ज लिया तो कइयों ने निजी स्तर पर पैसे उधार लिए हैं.
पत्नी का मंगलसूत्र गिरवी रखकर की थी खेती
अकोला के व्याला गांव में निरीक्षण के दौरान कान्हेरी गांव के किसान समाधान सुलकर अपनी व्यथा बताते-बताते भावुक हो गए.
उन्होंने उपमुख्यमंत्री को बताया कि खेती के लिए बैंक से कर्ज लिया था. बाकी खर्चों और दवाइयों के छिड़काव के लिए जब पैसे नहीं बचे तो उन्होंने अपनी पत्नी का मंगलसूत्र तक साहूकार के पास गिरवी रख दिया. समाधान ने रोते हुए कहा कि बारिश न होने से फसल खराब हो गई और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है.
किसान समाधान सुलकर को रोता देख उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आगे बढ़कर उनके कंधे पर हाथ रखा और उन्हें ढांढस बंधाया. शिंदे ने पीड़ित किसान को सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि सरकार उसके नुकसान की भरपाई में पूरी मदद करेगी. उपमुख्यमंत्री से आश्वासन मिलने के बाद किसान ने राहत की सांस ली. किसानों ने बताया कि 50 दिन से ज्यादा समय से बारिश नहीं हुई है, जिससे फसल का उत्पादन बेहद कम रहने की आशंका है.
कर्ज चुकाने की चिंता में घिरे किसान
चौपाल में जुटे अन्य किसानों ने भी डिप्टी सीएम के सामने अपनी समस्याएं रखीं. किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती में अपनी गाढ़ी कमाई और लाखों रुपये झोंक दिए हैं. अगर पैदावार कम हुई तो आमदनी घट जाएगी और कर्ज चुकाना नामुमकिन हो जाएगा. किसान चाहते हैं कि सरकार बिना देरी किए खेतों में हुए वास्तविक नुकसान का आकलन करे और तुरंत राहत पैकेज उपलब्ध कराए, ताकि वो इस दोहरे संकट से बाहर निकल सकें.