MP News: ग्वालियर की खस्ताहाल सड़कों को लेकर हाईकोर्ट में चल रही पीआईएल के बीच नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय का ट्रांसफर हो गया है. खास बात ये है कि कल ही हाईकोर्ट के आदेश पर शहर की चिन्हित सड़क से सैंपल लिए गए थे. इससे पहले हाईकोर्ट ने कोर्ट के आदेश के बावजूद चिन्हित सड़क पर काम कराए जाने को लेकर नगर निगम को जमकर फटकार लगाई थी.
कोर्ट ने तो यहां तक सख्त रुख अपनाते हुए कमिश्नर संघ प्रिय का मोबाइल तक जब्त करने की बात कही थी और उनके मोबाइल में हाईकोर्ट के आदेशों को चेक करने के निर्देश दिए थे.
अब इसी कार्रवाई के बीच शासन ने नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय का तबादला कर दिया है. 2018 बैच के आईएएस अधिकारी संघ प्रिय को अब सिंगरौली जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है.
'आजतक' ने जब कमिश्नर संघ प्रिय से इस पूरे मामले पर बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कैमरे पर बाइट देने से इनकार कर दिया. हालांकि, ऑफ कैमरा उन्होंने इसे रुटीन प्रशासनिक प्रक्रिया बताया.
IAS संघ प्रिय का कहना था कि ग्वालियर नगर निगम में उन्हें करीब डेढ़ साल हो चुका था. उन्होंने यह भी कहा कि साल 2017 बैच के कई अधिकारी अभी कलेक्टर बनने से रह गए हैं, जबकि वे 2018 बैच के हैं. ग्वालियर में अपने कार्यकाल को उन्होंने 'टिपिकल' बताया.
संघ प्रिय बोले- सिस्टम में बदलाव की जरूरत
वहीं, नगर निगम के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर IAS अफसर संघ प्रिय ने नगर निगम के ढर्रे पर सवाल भी उठाए. कहा,''नगर निगम एक स्वतंत्र बॉडी है, जहां लोग भर्ती होते हैं और यहीं से रिटायर हो जाते हैं. जो लोग तीन-चार साल से मठाधीश बने हुए हैं और जिन्हें एक ही जगह रहने की आदत हो गई है, उन्हें कुछ समय के लिए बाहर भेजा जाना चाहिए.''
लेकिन बड़ा सवाल अब भी वही है जिन सड़क की गुणवत्ता की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही है, उसके सैंपल लिए जा चुके हैं... रिपोर्ट आनी बाकी है.. और इसी बीच उस जांच से जुड़े नगर निगम के कमिश्नर का तबादला हो गया.
क्या यह महज रुटीन प्रशासनिक फेरबदल है? या हाईकोर्ट की सख्ती और सड़कों की जांच के बीच हुए इस ट्रांसफर को लेकर भी सवाल उठेंगे?