जम्मू रीजन के उधमपुर जिले में कई पहाड़ी इलाकों में कुछ संदिग्ध गतिविधि देखी गई है. इस पर सुरक्षबलों ने इन इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी और घेराबंदी का अभियान शुरू किया है. सूत्रों का कहना है कि यह एक रूटीन तलाशी अभियान है क्योंकि हाल ही में उधमपुर जिले में मुठभेड़ हुई थी.
इस अभियान में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया गया था. सुरक्षा बल यह पता लगाने के लिए तलाशी ले रहे हैं कि कहीं ऊंचे इलाकों में और आतंकवादी तो नहीं छिपे हैं.
16-17 सितंबर की रात मजलटा के ब्रट्टल सोहन और खुब्बन इलाकों में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया गया था. खुफिया जानकारी मिली थी कि इस इलाके में आतंकवादी मौजूद हैं. इसी ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादी मारे गए थे.
बता दें कि सीमा पार से घाटी के साथ ही जम्मू रीजन को दहलाने की लगातार साजिशें रची जाती हैं. हालांकि, सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और सटीक इनपुट के चलते आतंकियों और उनके आकाओं को हर बार मुंह की खानी पड़ती है. इसी कड़ी में बीते दिनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन ओवरग्राउंड वर्कर्स को घाटी में गिरफ्तार किया गया था.
आरोप है कि इन तीनों ने कई आतंकवादी संगठनों को राजौरी-रियासी से पीर पंजाल इलाके के रास्ते शोपियां जिले तक जाने में मदद की थी. गिरफ्तार आतंकियों के मददगारों की पहचान राजौरी के कोट चरवाल निवासी आजम, जाकिर हुसैन और मोहम्मद मुश्ताक के रूप में हुई, जिन्हें इस महीने की 14 तारीख को पकड़ा गया था.
इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि आरोपियों ने कई सालों तक आतंकियों को पनाह, लॉजिस्टिकल मदद और रास्ता दिखाने में मदद की थी. उनके गांव के पास एक जंगल से एक आईईडी भी बरामद किया गया. बाद में उनके ठिकाने से एक पिस्टल, मैगज़ीन, गोला-बारूद और दो चीनी ग्रेनेड मिले थे.