मुजफ्फराबाद, पीओके में पिछले एक महीने से जारी लॉकडाउन की वजह से पूरा सिस्टम ठप पड़ गया है. यहां के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि बैंकिंग व्यवस्था बंद है, इंटरनेट सेवा भी ठप है और पूरा प्रशासनिक ढांचा रुक गया है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए शख्स ने बताया कि सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी सबसे ज्यादा परेशान हैं क्योंकि उन्हें अपना वेतन और पेंशन तक नहीं मिल पा रहा है.
इस बीच जम्मू कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेएएसी के नेतृत्व में इलाके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि आजाद कश्मीर में हालात बेहद खराब हो चुके हैं.
पीओके के एक निवासी ने कहा कि राज्य को अभिभावक की तरह व्यवहार करना चाहिए और लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सख्ती दिखाने की बजाय शरीफ सरकार को लोगों के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए क्योंकि बातचीत से ही समाधान निकलता है और जबरदस्ती से मसले हल नहीं होते.
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जेएएसी के बैनर तले रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और अब्बासपुर जैसे इलाकों में कुछ दिन पहले हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे. एक रैली में करीब चालीस हजार लोग जुटे थे. प्रदर्शनकारी महंगाई, बिजली की बढ़ती दरों, आर्थिक शोषण और खाने पीने की चीजों तथा दवाओं की कमी को लेकर गुस्से में थे. लोग पाकिस्तान की 'मुनीर सेना' के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और आजादी के नारे भी लगाए थे.
जेएएसी ने मांग की है कि शौकत नवाज मीर समेत गिरफ्तार किए गए सभी नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए. इसके साथ ही संगठन ने अपनी 38 सूत्री मांगों को पूरा करने की भी अपील की . भारत पहले ही इस पूरे मामले में पाकिस्तान की दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा कर चुका है.