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कंगाली, बगावत और लाचारी! PoK में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच फिर कश्मीर का राग अलाप रहा आसिम मुनीर

पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने एक बार फिर कश्मीर को पाकिस्तान की नस बताते हुए भारत विरोधी बयान दिया है. यह बयान रावलपिंडी में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में आया जहां भारत पर मानवाधिकार हनन और डेमोग्राफिक बदलाव के आरोप लगाए गए. यह बयान ऐसे समय आया है जब पीओजेके में विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं.

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JAAC के अल्टीमेटम के बीच पाकिस्तान की सेना ने फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा (Photo: ITG)
JAAC के अल्टीमेटम के बीच पाकिस्तान की सेना ने फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा (Photo: ITG)

पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर कश्मीर को लेकर भारत विरोधी बयान दिया है. उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की 'जुगुलर वेन' यानी सबसे अहम नस बताया है. यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं और वहां के लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं. 

रावलपिंडी के जीएचक्यू में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में आसिम मुनीर की अध्यक्षता में पाकिस्तानी सेना ने भारत पर जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार हनन और डेमोग्राफिक बदलाव के आरोप लगाए हैं.

पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर के बयान के मुताबिक कश्मीर पाकिस्तान के लिए बेहद अहम मुद्दा बना हुआ है. यह बयान तब आया है जब पीओजेके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेएएसी ने पाकिस्तान और पीओजेके सरकार को 8 जुलाई तक की डेडलाइन दी है. 

कमेटी ने कहा है कि अगर उनकी मांगें 8 जुलाई तक नहीं मानी गईं तो आगे की रणनीति का ऐलान उसी दिन धरना स्थल से किया जाएगा. कमेटी ने अपने समर्थकों से पूरी तैयारी के साथ अनुशासन बनाए रखने की अपील भी की है.

यह भी पढ़ें: 'PAK के हिस्से का पानी...' सिंधु जल समझौते पर अब मुनीर की सेना ने दी गीदड़भभकी

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वहीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी सेना ने देश की सुरक्षा स्थिति और सैन्य तैयारियों का जायजा लिया. आईएसपीआर ने दावा किया कि भारत समर्थित आतंकी गुट अफगान तालिबान के कब्जे वाले इलाकों से ऑपरेट कर रहे हैं और पाकिस्तान के अंदर हमले कर रहे हैं. 

सेना ने ऑपरेशन गजब-उल-हक के तहत आतंकवाद विरोधी अभियान जारी रखने की बात दोहराई. इसके अलावा आईएसपीआर ने भारत पर हाइब्रिड वॉरफेयर और झूठी जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया और सिंधु जल संधि को लेकर अपना पुराना रुख दोहराया.

आलोचकों का कहना है कि पीओजेके में मुजफ्फराबाद समझौते को लागू करने की मांग को लेकर बढ़ते विरोध से ध्यान भटकाने के लिए ही यह बयान दिया गया है.

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