फारूक अब्दुल्ला के बाद अब पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी 'एक्सेशन डे' के मौके पर जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय का मुद्दा उठाया है. महबूबा ने महात्मा गांधी के धर्मनिरपेक्ष भारत के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर ने भारत के साथ जुड़ने का फैसला कुछ गारंटियों के भरोसे किया था. अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को सख्ती करने की बजाय जम्मू कश्मीर के लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए.
महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों की मुश्किलें बढ़ीं. उन्होंने सुरक्षाबलों की भारी तैनाती, छापेमारी, युवाओं को हिरासत में लिए जाने का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में खामोशी को अमन और सामान्य स्थिति बताती है, जबकि उनके मुताबिक यह खामोशी नहीं बल्कि डर है.
महबूबा मुफ्ती ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का समाधान इंसानियत, एकता और कश्मीरियत से होना चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर के हालात को समझने की अपील की.
'हरियाणा में जो हुआ...'
PDP प्रमुख ने हरियाणा में एक कश्मीरी बस पर पत्थर फेंकने की घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को आज भी संदेह भरी नजरों से देखा जाता है. उन्होंने हरियाणा की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं चिंता पैदा करती हैं.
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उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर ने ऐसे भारत के साथ जुड़ने का फैसला किया था जिसकी कल्पना महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव अंबेडकर ने की थी. उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर भारत के साथ किन परिस्थितियों में आया था यह याद रखना चाहिए.'
उन्होंने केंद्र सरकार से सख्ती न बरतने की भी अपील की. उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर को घसीटकर अपने साथ रखने की बजाय उसका हाथ पकड़कर आप उसे अपने साथ चलाइए.'