जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के कैबिनेट फेरबदल के बाद सियासी घमासान बढ़ गया है. सरकार में खाली पदों को भरने और क्षेत्रीय संतुलन बनाने के लिए किए गए विस्तार के बाद सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. वहीं, विपक्षी बीजेपी भी इस स्थिति को भुनाने में जुट गई है.
श्रीनगर के लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने चार नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी (कलू) शामिल हैं. वहीं, निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया.
मंत्रियों के शपथ लेने के कुछ ही घंटों बाद पार्टी के कई सीनियर विधायक अपनी अनदेखी से नाराज नजर आए. कुछ नेताओं ने खुले तौर पर असंतोष जताया और अपने स्तर पर आगे कदम उठाने की चेतावनी दी. इसके बाद घाटी के कुछ हिस्सों में उन विधायकों के समर्थकों की ओर से प्रदर्शन भी हुए, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली. वहीं, सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद जम्मू क्षेत्र से जुड़े उनके समर्थकों और निर्दलीय नेताओं में भी नाराजगी की बात सामने आई है.
कैबिनेट में कश्मीर का दबदबा बढ़ा
कैबिनेट फेरबदल के बाद क्षेत्रीय संतुलन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. अब नौ मंत्रियों में से सात कश्मीर घाटी से हैं. जम्मू क्षेत्र से केवल उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद राणा मंत्रिमंडल में हैं. इसी वजह से जम्मू क्षेत्र की राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर भी असंतोष की चर्चा तेज हो गई है.
BJP ने NC विधायकों से संपर्क का दावा किया
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जम्मू और श्रीनगर के राजनीतिक गलियारों में NC के नाराज विधायकों और बीजेपी नेताओं के बीच संपर्क और कथित बैकचैनल बैठकों की चर्चा है. हालांकि, संबंधित नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर ऐसी मुलाकातों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है. बीजेपी सूत्रों ने दावा किया है कि पार्टी NC के नौ ऐसे विधायकों के संपर्क में है, जो नेतृत्व से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. इससे जम्मू-कश्मीर की राजनीति में संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.
BJP ने NC को बताया 'बंटा हुआ घर'
बीजेपी ने कैबिनेट फेरबदल को लेकर उमर अब्दुल्ला सरकार पर हमला तेज कर दिया है. पार्टी ने NC को 'बंटा हुआ घर' बताते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष बढ़ रहा है. बीजेपी नेताओं ने सतीश शर्मा को हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि इसके बाद उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी मंत्रिमंडल में एकमात्र हिंदू चेहरा रह गए हैं. विपक्ष ने इसे क्षेत्रीय और सांस्कृतिक ध्रुवीकरण से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला सरकार एक साथ दो मोर्चों पर जूझ रही है. एक तरफ जनता के सवाल हैं, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी है.
उमर अब्दुल्ला के सामने बड़ी चुनौती
NC नेतृत्व अब नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष को संभालना आसान नहीं माना जा रहा. विपक्ष भी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि उमर अब्दुल्ला पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को शांत कर पाते हैं या यह राजनीतिक संकट और गहराता है.