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'मुफ्त की चीज की कद्र नहीं होती', UPI मर्चेंट चार्ज पर बोले उमर अब्दुल्ला- आम जनता पर न पड़े बोझ, कंपनियों पर टैक्स से कोई एतराज नहीं

सरकार ने व्यापारियों को यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला किया है, जिस पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह चार्ज सभी पर लागू नहीं होगा. व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और आम ग्राहकों को भी तब तक चार्ज नहीं देना होगा जब तक उनका लेन-देन एक तय सीमा से ऊपर न जाए.

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UPI पर MDR को लेकर जम्मू-कश्मीर CM उमर अब्दुल्ला का बयान सामने आया है (Photo: ITG)
UPI पर MDR को लेकर जम्मू-कश्मीर CM उमर अब्दुल्ला का बयान सामने आया है (Photo: ITG)

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने यूपीआई भुगतान पर सरकार द्वारा लगाए गए नए चार्ज पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. दरअसल सरकार ने व्यापारियों को यूपीआई से होने वाले भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने का फैसला लिया है. इस फैसले के बाद लोगों में यह चिंता बढ़ गई थी कि क्या अब आम आदमी को भी यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने पड़ेंगे. ओमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि यह चार्ज हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है.

ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले पैसों के लेन-देन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. यानी अगर कोई अपने दोस्त, परिवार या किसी अन्य व्यक्ति को यूपीआई के जरिए पैसे भेजता है, तो उसे इसके लिए कुछ नहीं देना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि आम ग्राहकों पर भी तब तक कोई चार्ज नहीं लगेगा जब तक उनका लेन-देन एक तय सीमा को पार नहीं कर जाता. यानी छोटे और सामान्य भुगतान करने वाले लोगों को इस फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

मुख्यमंत्री ने यह भी समझाया कि यूपीआई सिस्टम को चलाना कोई सस्ता काम नहीं है, इसके पीछे काफी पैसा खर्च होता है. उन्होंने कहा कि हम अक्सर उन चीजों की कद्र नहीं करते जो हमें मुफ्त में मिलती हैं, जबकि उन्हें बनाए रखने में भारी खर्च आता है. इसी वजह से उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि आम जनता पर इस तरह का कोई बोझ न डाला जाए.

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हालांकि ओमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि अगर यह चार्ज कंपनियों पर लगाया जाता है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है. उनका तर्क है कि कंपनियां वैसे भी यूपीआई के जरिए अच्छा खासा मुनाफा कमाती हैं, इसलिए उन पर चार्ज लगना गलत नहीं है. कुल मिलाकर उनका पूरा जोर इस बात पर रहा कि आम आदमी की जेब पर असर नहीं पड़ना चाहिए, जबकि व्यापारिक फायदा उठाने वाली कंपनियों से पैसा लेना जायज है.

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