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‘मेरे बेटे का सवाल था...', कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के बाद सस्पेंड हुई टीचर का छलका दर्द

बहादुरगढ़ की रहने वाली गेस्ट टीचर सुलेखा दलाल को दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल होने के बाद सस्पेंड कर दिया गया. सुलेखा का कहना है कि वह अपने बेटे और अन्य युवाओं के हक की लड़ाई के लिए वहां गई थीं. उनका आरोप है कि अधिकारियों ने अभी तक सस्पेंशन की वजह भी नहीं बताई है.

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गेस्ट टीचर सुलेखा दलाल को किया सस्पेंड. (Photo: Representational)
गेस्ट टीचर सुलेखा दलाल को किया सस्पेंड. (Photo: Representational)

दिल्ली में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल होने पहुंचीं हरियाणा की एक महिला गेस्ट टीचर को सस्पेंड कर दिया गया है. सस्पेंड की गई टीचर सुलेखा दलाल का कहना है कि वह किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने बेटे और युवाओं के भविष्य की चिंता को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुई थीं.

बहादुरगढ़ की रहने वाली सुलेखा दलाल रोहतक की रेनकपुरा कॉलोनी स्थित गवर्नमेंट मिडिल स्कूल में प्राइमरी गेस्ट टीचर के पद पर काम करती हैं. सुलेखा के मुताबिक, वह 6 जून को दिल्ली में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल हुई थीं. इसके बाद 10 जून को जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी की तरफ से उन्हें सस्पेंड किए जाने का पत्र जारी कर दिया गया.

सस्पेंशन के बाद भावुक हुईं टीचर

सुलेखा का कहना है कि उन्हें सस्पेंड किए जाने की जानकारी तो पत्र के माध्यम से दे दी गई, लेकिन अधिकारियों ने अब तक यह नहीं बताया कि आखिर उन्हें किस वजह से निलंबित किया गया है. उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में 100 में से 75 अंक हासिल किए थे, लेकिन भर्ती नहीं होने के बाद से वह लगातार परेशान और डिप्रेशन में है. एक मां होने के नाते वह अपने बेटे के हक की लड़ाई लड़ने के लिए प्रदर्शन में शामिल हुई थीं.

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सस्पेंशन के बाद सुलेखा दलाल का दावा है कि उन्हें विपक्षी दलों के नेताओं से लेकर कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों तक के फोन आ चुके हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि उनका राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है और न ही उन्होंने किसी दल से जुड़ने का फैसला किया है.

सुलेखा ने कहा कि सस्पेंड होने के बाद भी लोगों ने उनका हौसला बढ़ाया है. उनका मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियां सिर्फ उनके बेटे को ही नहीं, बल्कि देश के हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं. इसी चिंता को लेकर वह प्रदर्शन में शामिल हुई थीं.

बेटे के लिए आवाज उठाने पहुंची थी मां

उन्होंने कहा कि जब वह प्रदर्शन में गई थीं तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि मामला इतना बड़ा हो जाएगा. शुरुआत में वह अकेले अपनी बात रखने पहुंची थीं, लेकिन अब उन्हें बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन और हिम्मत मिल रही है. सुलेखा का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.
 

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