अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिले चढ़ावे और दान में कथित गड़बड़ी की जांच को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई, सोमवार को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली तीन जजों की पीठ करेगी. पीठ में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.एस. मोहना भी शामिल होंगे. सुप्रीम कोर्ट की सूची के अनुसार, इस मामले में दाखिल जनहित याचिकाओं पर सुनवाई तय की गई है.
सुनवाई के लिए वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की जनहित याचिका के साथ राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की याचिका भी सूचीबद्ध है. इस मामले में इससे पहले भी ग्रीष्मावकाश के दौरान जल्द सुनवाई की मांग की गई थी. हालांकि उस समय अवकाशकालीन पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मामला सुना जाएगा. पीठ ने यह भी कहा था कि फिलहाल मामले में ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है, जिसके कारण तत्काल सुनवाई की जरूरत हो.
याचिका में क्या-क्या मांग की गई है
याचिका में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जांच की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दान की राशि में किसी तरह की गड़बड़ी, गबन या भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं. याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले की जांच सीबीआई की अगुआई में गठित एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी से कराई जाए.
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले में एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है. साथ ही विशेष जांच दल जांच कर अंतरिम रिपोर्ट भी सौंप चुका है. याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी मांग की है कि रामजन्मभूमि ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया जाए कि जांच पूरी होने तक सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं. इन रिकॉर्ड में बैंक खाते, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर डेटा सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं. साथ ही किसी भी रिकॉर्ड या सबूत को नष्ट करने या उसमें छेड़छाड़ करने पर रोक लगाने की भी मांग की गई है.
ऑडिट व्यवस्था मजबूत करने की मांग
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार को ट्रस्ट की धनराशि और संपत्तियों की निगरानी के लिए मजबूत ऑडिट और जांच व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे भविष्य में इस तरह की शिकायतों को रोका जा सकेगा. अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ 13 जुलाई को सुनवाई करेगी. मामले में अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें रखी जाएंगी.