फरीदाबाद पुलिस ने अडानी गैस के ग्राहकों को बिल भुगतान के नाम पर खतरनाक APK फाइल भेजकर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गैंग के मास्टरमाइंड समेत दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने एक बुजुर्ग से 5 लाख 12 हजार 334 रुपये की ठगी की थी. मामले में पहले पकड़े गए पांच आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं.
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से करीब 20 हजार अडानी गैस उपभोक्ताओं और एक हजार UCO Bank ग्राहकों का डेटा बरामद किया है. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने 116 लोगों को APK फाइल भेजी थी. पुलिस ने छह मोबाइल फोन, SIM कार्ड, क्रेडिट कार्ड और साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं.
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मामला फरीदाबाद के सेक्टर-37 निवासी एक बुजुर्ग की शिकायत से सामने आया. उन्होंने 1 सितंबर को पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल पर अडानी गैस बिल जमा करने का मैसेज आया था. संदेश में चेतावनी दी गई थी कि समय पर भुगतान नहीं करने पर गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा. मैसेज में एक मोबाइल नंबर भी दिया गया था.
एक APK ने खाली कर दिया बैंक खाता
बुजुर्ग ने संदेश में दिए नंबर पर संपर्क किया तो साइबर ठगों ने उन्हें एक APK फाइल भेजी और उसे खोलने के लिए कहा. जैसे ही उन्होंने फाइल डाउनलोड कर खोली, ठगों ने उनके मोबाइल फोन तक पहुंच हासिल कर ली. इसके बाद बैंक खाते से 5 लाख 12 हजार 334 रुपये निकाल लिए गए.
शिकायत के आधार पर फरीदाबाद के साइबर सेंट्रल पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई. पुलिस ने जांच शुरू करते हुए इस मामले में पहले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनकी पहचान अश्विन भाई, खुंट धवल, मनीष भाई, दीप विठ्ठलभाई और पीठाभाई भाया भाई के रूप में हुई. सभी आरोपी गुजरात के सूरत के रहने वाले बताए गए हैं.
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड दीपक कुमार मंडल को गिरफ्तार किया. वह झारखंड के गिरिडीह जिले का रहने वाला है. उसके साथ देवघर निवासी अनिल कुमार मंडल को भी पकड़ा गया है. दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद चार दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है.
Telegram से खरीदता था डेटा, फिर APK से बनाता था शिकार
पूछताछ में पुलिस को गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में अहम जानकारी मिली. फरीदाबाद के साइबर सेंट्रल पुलिस स्टेशन के SHO बसंत कुमार ने बताया कि गैंग का सरगना दीपक कुमार मंडल RTO और अडानी गैस से संबंधित नागरिकों का डेटा खरीदता था. इसके साथ ही Telegram के जरिए APK फाइलें भी हासिल करता था.
इस डेटा के आधार पर लोगों को फोन किया जाता और उन्हें डराया-धमकाया जाता था. इसके बाद बिल भुगतान या दूसरी जरूरत के बहाने APK फाइल डाउनलोड करने के लिए तैयार किया जाता. फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होते ही दीपक को फोन तक पूरी पहुंच मिल जाती थी. पुलिस के मुताबिक, ठगी से मिले पैसों का इस्तेमाल दीपक अपने बकाया क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने में करता था.
पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से अभी पूछताछ जारी है. जांच के दौरान बरामद करीब 20 हजार अडानी गैस ग्राहकों और 1 हजार UCO Bank ग्राहकों के डेटा के स्रोत और इसके इस्तेमाल से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि 116 लोगों को भेजी गई APK फाइलों के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया.
क्या होता है APK और क्यों है खतरनाक?
APK यानी Android Package Kit, Android ऑपरेटिंग सिस्टम में मोबाइल ऐप इंस्टॉल और वितरित करने के लिए इस्तेमाल होने वाला फाइल फॉर्मेट है. साइबर अपराधी इसी फाइल का इस्तेमाल लोगों को धोखा देने के लिए कर सकते हैं. अनजान नंबर या संदिग्ध मैसेज से मिली APK फाइल डाउनलोड करने पर मोबाइल और उसमें मौजूद निजी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का खतरा रहता है.
फरीदाबाद पुलिस की जांच में सामने आया यह मामला इसी तरीके से की गई साइबर ठगी का उदाहरण है, जहां गैस बिल भुगतान का डर दिखाकर पीड़ित को APK फाइल खोलने के लिए तैयार किया गया. इसके बाद उसके बैंक खाते से बड़ी रकम निकाल ली गई. पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और बरामद डेटा के नेटवर्क की भी जांच कर रही है.