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बुर्का पहनकर पहुंची, प्रेमी पर फेंका एसिड... अहमदाबाद कोर्ट ने सुनाई मुस्लिम महिला को 10 साल की सजा

अहमदाबाद की एक सेशंस कोर्ट ने AMTS कर्मचारी पर एसिड अटैक के मामले में महिला आरोपी महजबीनबानू छुवारा को दोषी करार देते हुए 10 साल की कठोर कैद और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. अदालत ने गवाहों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया.

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शादीशुदा होने के कारण खत्म किया रिश्ता.(Photo: Representational)
शादीशुदा होने के कारण खत्म किया रिश्ता.(Photo: Representational)

गुजरात के अहमदाबाद में प्रेम संबंध टूटने के बाद हुए एसिड अटैक मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने AMTS कर्मचारी पर एसिड फेंकने की दोषी महजबीनबानू छुवारा को 10 साल की कठोर कैद और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा.

दरअसल, यह फैसला अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट के जज एस.आर. सांगाणी ने सुनाया. सुनवाई के दौरान सरकारी वकील विजयसिंह चावड़ा ने कोर्ट के सामने 8 गवाहों के बयान और 15 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए. इन्हीं के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया.

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जांच के दौरान सामने आया कि पीड़ित AMTS में कर्मचारी था. करीब पांच साल पहले उसकी पहचान महजबीनबानू से हुई थी. दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई और बाद में प्रेम संबंध बन गए.

शादीशुदा होने के कारण खत्म किया रिश्ता, फिर हुआ हमला

कोर्ट में पेश जानकारी के अनुसार, पीड़ित पहले से शादीशुदा था. जब उसके परिवार को प्रेम संबंध की जानकारी मिली तो उसने करीब एक साल पहले आरोपी महिला से संबंध खत्म कर लिए.

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अभियोजन पक्ष के मुताबिक घटना वाले दिन पीड़ित कालूपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित AMTS कार्यालय में ड्यूटी पर था. उसी दौरान आरोपी महिला कथित तौर पर बुर्का पहनकर अपने एक साथी के साथ वहां पहुंची.

दोनों के बीच रिश्ता खत्म करने को लेकर बहस हुई. आरोप है कि इसके बाद महिला ने पहले पीड़ित के साथ मारपीट की और फिर उस पर एसिड फेंक दिया. हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गई.

आंख, पीठ और गुप्तांग झुलसे, पीड़ित ने लगाए गंभीर आरोप

एसिड अटैक में पीड़ित की आंख, पीठ और गुप्तांग गंभीर रूप से झुलस गए. इलाज के बावजूद उसकी आंखों की रोशनी पर स्थायी असर पड़ने की बात अदालत में रखी गई.

पीड़ित ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि आरोपी महिला लगातार उस पर प्रेम संबंध बनाए रखने का दबाव डालती थी. उसने यह भी आरोप लगाया कि महिला पहले उसकी बेटी का घर तोड़ने की कोशिश कर चुकी थी, जिसकी शिकायत भी पहले की गई थी.

पीड़ित ने यह आरोप भी लगाया कि आरोपी उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाती थी. इन आरोपों का उल्लेख अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से किया गया.

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया

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मामले की जांच के दौरान FSL रिपोर्ट में पीड़ित के कपड़ों और घटनास्थल से एसिड के अंश मिले. अदालत ने इन्हें महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य माना.

बचाव पक्ष ने दलील दी कि घटना के समय महिला बुर्का पहने हुई थी, इसलिए उसकी पहचान सुनिश्चित नहीं की जा सकती. साथ ही आरोपी के मोबाइल फोन की लोकेशन भी घटनास्थल पर नहीं मिली थी. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पीड़ित के अन्य महिलाओं से भी संबंध थे और उसी वजह से झूठा मामला दर्ज कराया गया.

हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने गवाहों के बयान, वैज्ञानिक साक्ष्यों और पूरे घटनाक्रम को विश्वसनीय मानते हुए महजबीनबानू छुवारा को दोषी करार दिया. अदालत ने आरोपी को 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाने के साथ 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.

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