महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक नाना पटोले ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया तानाशाही वाला है और इससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है.
पटोले ने कहा कि सोनम वांगचुक को चादर में लपेटकर जबरन अस्पताल ले जाया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर दिल्ली हाईकोर्ट ने किस तरह के निर्देश दिए थे, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई.
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. शनिवार को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई. दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और मेडिकल सलाह के आधार पर उठाया गया.
नाना पटोले ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अब अंकपत्र में गड़बड़ी के भी आरोप सामने आ रहे हैं और इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ निकाले जाने वाले विरोध मार्च में शामिल होगी.
इस दौरान पटोले ने समाजवादी नेता डॉ. कुमार सप्तर्षि के निधन पर भी शोक व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने जनता के लिए संघर्ष करने वाला एक समर्पित नेता खो दिया है और उनके जाने से राज्य की राजनीति में बड़ी कमी आई है.