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कौन हैं बरखा त्रेहन? जिन्होंने अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी, जानिए सबकुछ

बरखा त्रेहन का नाम अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकने के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. पेशे से वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो पुरुषों के अधिकारों के लिए मुखर होकर आवाज उठाती हैं. कई मुद्दों को लेकर पहले भी उनकी आलोचना हो चुकी है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर का मामला भी शामिल है.

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बरखा त्रेहन अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकने के बाद सुर्खियों में हैं.
बरखा त्रेहन अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकने के बाद सुर्खियों में हैं.

जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर सोनम वांगचुक के बाद जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह बरखा त्रेहन का है. शनिवार (18 जुलाई) को अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकने के बाद बरखा सुर्खियों में आ गईं. बरखा भारत में पुरुषों के अधिकारों के लिए मुखर रूप से आवाज उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता हैं. दोपहर करीब 1:20 बजे, जब अभिजीत दीपके, सोनम वांगचुक को लेकर समर्थकों को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान स्याही फेंकने की घटना हुई. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. लोगों ने महिला को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

घटना के बाद बरखा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि 'हां, मैं बरखा त्रेहन हूं, वही महिला जिसने उस कट्टरपंथी अर्बन नक्सल अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी थी, क्योंकि उसने मेरे प्रभु श्रीराम का अपमान किए जाने पर अपनी कॉकरोच जनता पार्टी के मंच पर हंसी उड़ाई थी. मैं कट्टर हिंदू हूं. मैं बहुत आहत थी. यह मेरा विरोध था और मुझे इस पर गर्व है. जय हिंद. जय श्रीराम."

बरखा ने अपने साथ मारपीट का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि घटना के बाद सीजेपी समर्थकों ने उन पर हमला किया, उन्हें पीटा और उनके बाल खींचे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक का आयोजकों द्वारा 'इस्तेमाल' किया जा रहा है और इसकी तुलना उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से की. एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, "मैंने अभिजीत पर स्याही केवल अपना विरोध जताने के लिए फेंकी थी. मुझे मजबूर होकर ऐसा करना पड़ा. मैं ऐसी हरकतें कभी बर्दाश्त नहीं करती. जहां तक गुंडों की बात है, उन्होंने मुझे बुरी तरह पीटा और मेरे बाल नोचे."

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कौन हैं बरखा त्रेहन?

बरखा त्रेहन एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो पुरुष आयोग की अध्यक्ष के रूप में जानी जाती हैं. यह संगठन पुरुषों के अधिकारों के लिए अभियान चलाता है और जेंडर से जुड़े मामलों में कानूनी सुधारों की वकालत करता है. बरखा ने अपने अभियानों के जरिए दहेज, घरेलू हिंसा और विवाह से जुड़े मामलों में कानूनों के कथित दुरुपयोग पर लगातार चिंता जताई है. उन्होंने भारत में वैधानिक पुरुष आयोग की स्थापना की भी मांग की है. बरखा जेंडर-न्यूट्रल कानूनों की वकालत करती हैं और पुरुषों व महिलाओं दोनों के लिए संतुलित न्याय की बात करती हैं.

आलोचनाओं से पुराना नाता

बरखा त्रेहन कई सार्वजनिक विवादों का भी हिस्सा रह चुकी हैं. उन्नाव रेप मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने पर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. पुलिस के अनुसार, त्रेहन को आखिरी बार 25 दिसंबर, 2025 को जंतर-मंतर पर देखा गया था, जहां पुरुष आयोग की ओर से उन्नाव मामले में कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित किया गया था.
 

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