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'बच्चों को रामलीला दिखाने जरूर लाएं'... रावण बनकर दिल्ली के मंच पर उतरे शाहबाज खान, कह दी बड़ी बात

दिल्ली के कड़कड़डूमा में चल रही रामलीला में बॉलीवुड अभिनेता शाहबाज खान रावण की भूमिका निभा रहे हैं. मंच पर पंचवटी, सीता हरण और जटायु वध जैसे प्रसंगों का मंचन हुआ. इस दौरान शाहबाज खान ने माता-पिता से बच्चों को रामलीला दिखाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह परंपरा संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जुड़ने का मौका देती है.

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अभिनेता शहबाज खान ने रामलीला में निभाया रावण का किरदार. (Photo: Screengrab)
अभिनेता शहबाज खान ने रामलीला में निभाया रावण का किरदार. (Photo: Screengrab)

रावण का नाम आते ही दिमाग में एक तस्वीर बनती है. दस सिर, सोने की लंका, अपार ताकत और ऐसा अहंकार, जो आखिरकार उसके पतन की वजह बना. रामायण की कहानी में रावण खलनायक है, लेकिन रामलीला के मंच पर उसका किरदार निभाने वाले कलाकार के लिए यह सिर्फ एक भूमिका नहीं, बल्कि अभिनय की बड़ी चुनौती भी है... दिल्ली के कड़कड़डूमा में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है.

पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड में चल रही हनुमंत रामलीला में बॉलीवुड अभिनेता शाहबाज खान रावण के किरदार में नजर आए. उनके मंच पर आते ही दर्शकों में उत्साह देखने को मिला. रावण की भूमिका निभाने के साथ शाहबाज खान ने एक ऐसी बात भी कही, जो इस आयोजन के मकसद से जुड़ी है. उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को रामलीला दिखाने जरूर लाएं. उनका कहना है कि रामलीला सिर्फ मनोरंजन नहीं है. यह बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी है.

यहां देखें Video

10 अक्टूबर से शुरू हुई यह रामलीला 20 अक्टूबर तक चलेगी. यहां रामायण के अलग-अलग प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है. इसी कड़ी में पंचवटी प्रसंग, सीता हरण, जटायु वध और भगवान श्रीराम की प्रतिज्ञा जैसे दृश्य मंच पर उतरे. इन दृश्यों में सीता हरण और जटायु वध भी था.

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रामायण की कथा के मुताबिक, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण पंचवटी में रहते हैं. इसी दौरान रावण की प्लानिंग से घटनाएं ऐसा मोड़ लेती हैं कि वह छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लेता है. सीता को बचाने के लिए जटायु रावण से भिड़ जाता है. वह अपनी पूरी ताकत लगा देता है, लेकिन रावण के हाथों घायल होकर गिर पड़ता है. 

यह भी पढ़ें: दिल्ली की रामलीला में रावण के साथ जलेगा 30 फीट का कॉकरोच, आयोजकों ने बताया- स्वच्छता का संदेश देने की पहल

यह प्रसंग सिर्फ सीता हरण की घटना नहीं है. इसमें जटायु का साहस और दूसरे की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालने का भाव भी है. रामलीला में जब ये दृश्य कलाकारों के अभिनय और संवादों के साथ सामने आते हैं, तो दर्शक कहानी को केवल सुनते नहीं, बल्कि उसे घटते हुए देखते हैं.

यही मंचीय प्रस्तुति रामलीला को खास बनाती है. किताब में पढ़ी या घर में सुनी गई कहानी जब सामने अभिनय के रूप में आती है, तो उसका असर अलग हो सकता है. बच्चों के लिए तो यह रामायण के पात्रों और घटनाओं को जानने का एक दिलचस्प तरीका भी है.

रावण बने शाहबाज खान को देखने उमड़े दर्शक

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इस बार हनुमंत रामलीला में बॉलीवुड अभिनेता शाहबाज खान रावण की भूमिका निभा रहे हैं. उनकी मंच पर एंट्री के साथ ही दर्शकों में उत्साह था. लोग रावण के रूप में उनके अभिनय को देखने के लिए उत्सुक नजर आए. रावण का किरदार रामलीला के सबसे चर्चित पात्रों में से एक है.

उसके संवाद, व्यक्तित्व और मंच पर मौजूदगी से कहानी में नाटकीयता आती है. लेकिन रावण की कहानी का सबसे बड़ा पहलू उसका अंत भी है. वह शक्तिशाली और विद्वान होने के बावजूद अपने अहंकार और गलत फैसलों के कारण विनाश की ओर बढ़ता है.

रामलीला में रावण का किरदार केवल डर या नकारात्मकता दिखाने तक सीमित नहीं रहता. यह दर्शकों को उसके चरित्र और उसके फैसलों के नतीजों पर सोचने का मौका भी देता है. शाहबाज खान ने इसी किरदार को मंच पर निभाया. उनके अभिनय को देखने के लिए पहुंचे दर्शकों के बीच रामलीला को लेकर उत्साह दिखाई दिया.

Shahbaz Khan Plays Ravana at Delhi Ramlila Urges Parents to Bring Children

शाहबाज खान ने बच्चों को लेकर क्या कहा?

रावण की भूमिका निभा रहे शाहबाज खान ने रामलीला के महत्व पर बात करते हुए कहा कि इसे सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं समझना चाहिए. उनके मुताबिक, रामलीला लोगों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को समझने का मौका देती है. उन्होंने माता-पिता से खास तौर पर कहा कि वे अपने बच्चों को रामलीला दिखाने जरूर लाएं. इससे बच्चे अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ सकेंगे. उन्हें बड़ों का सम्मान करने और अच्छे संस्कार अपनाने की प्रेरणा भी मिल सकती है.

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इस अपील के पीछे एक सीधी-सी बात है. बच्चों को अपनी परंपराओं के बारे में बताने के कई तरीके हो सकते हैं. उन्हें कहानियां सुनाई जा सकती हैं, किताबें पढ़ाई जा सकती हैं या रामायण के प्रसंग समझाए जा सकते हैं. रामलीला इन सबके बीच एक ऐसा माध्यम है, जहां कहानी अभिनय, संवाद और मंच के जरिए सामने आती है.

आज बच्चों के मनोरंजन का बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन और डिजिटल स्क्रीन पर बीतता है. ऐसे में रामलीला जैसे सार्वजनिक आयोजन उन्हें परिवार के साथ समय बिताने और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का मौका देते हैं.

कई साल से हो रही रामलीला, सुरक्षा के लिए भी इंतजाम

कड़कड़डूमा के सीबीडी ग्राउंड में हनुमंत रामलीला कमेटी कई वर्षों से इस आयोजन को कराती आ रही है. कमेटी का कहना है कि रामलीला के जरिए लोगों को धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाता है. हर साल आयोजन को खास बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकारों को बुलाया जाता है. इस बार शाहबाज खान की मौजूदगी भी इसी का हिस्सा है.

कमेटी के लीला मंत्री विनीत जैन ने बताया कि दर्शकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस के सहयोग से व्यवस्थाएं की गई हैं. आयोजन स्थल पर वॉलंटियर्स तैनात हैं और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है.

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