संसद के आगामी मॉनसून सत्र को लेकर सत्ताधारी गठबंधन ने अपनी रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी को लेकर रक्षामंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह के आवास पर शुक्रवार को NDA फ्लोर लीडर्स की अहम बैठक बुलाई गई है. पार्टी सूत्रों ने ये जानकारी दी.
सूत्रों की मानें तो इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नीट (NEET) पेपर लीक, राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी और संविधान संशोधन विधेयक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष के हमलों का सामना करने के लिए मजबूत रणनीतिक खाका तैयार करना है. सत्ताधारी गठबंधन अपनी संख्या बल के आधार पर इन विधेयकों को पारित कराने की पूरी रूपरेखा तैयार करेगा.
सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष
सोमवार से शुरू हो रहा संसद का मॉनसून सत्र बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं. विपक्षी दल कई बड़े मुद्दों पर सरकार को चौतरफा घेरने की रणनीति बना रहे हैं. विपक्ष द्वारा नीट पेपर लीक मामले के अलावा पश्चिम एशिया संघर्ष में भारतीय नाविकों की मौत और पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए जाएंगे. इसके साथ ही अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और हेराफेरी का मुद्दा भी संसद में जोर-शोर से गूंजेगा.
NDA के पास है बढ़त
सूत्रों का ये भी कहना है कि इस बार संसद में सत्ताधारी गठबंधन के हौसले काफी बुलंद दिखाई दे रहे हैं.पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद विपक्ष काफी कमजोर हुआ है. इसके अलावा तमिलनाडु में टीवीके (TVK) द्वारा सरकार गठन को लेकर कांग्रेस और द्रमुक (DMK) के बीच आपसी मतभेद गहरे हो गए हैं. विपक्ष की इस अंदरूनी फूट का सीधा फायदा उठाने के लिए एनडीए पूरी तरह तैयार है.
नंबर गेम का अलसी टेस्ट
बताया जा रहा है कि इस सत्र के दौरान संसद की एक संयुक्त समिति उस संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी रिपोर्ट अपना सकती है, जिसमें गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है. इस विधेयक को पास कराना एनडीए के लिए नंबर गेम की बड़ी परीक्षा होगी, क्योंकि इसके लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी है. पिछले सत्र में महिला आरक्षण विधेयक आवश्यक संख्या बल न होने के कारण गिर गया था.
आगामी सत्र में सरकार महिला कोटा कानून और एक संशोधित परिसीमन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में पेश कर सकती है. सरकार दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक शक्ति कम होने की चिंताओं को दूर करने के लिए सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने के कई विकल्पों पर काम कर रही है. ये ड्राफ्ट दक्षिणी राज्यों की इस चिंता को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन प्रक्रिया से लोकसभा में उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी.