प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के पास लोक कल्याण मार्ग पर स्थित IAF स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को अगले आदेश तक सदस्यों के लिए बंद कर दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, ये कदम केंद्र सरकार के भारतीय वायु सेना को आवंटित की गई इस कीमती जमीन को वापस लेने की कोशिशों के बीच उठाया गया है.
इससे पहले केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने इस संबंध में संबंधित निकायों को अपनी योजना के बारे में बताया था. गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल और रेस्तरां से लैस इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के अचानक बंद होने से 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह का विदाई गोल्फ कार्यक्रम (गोल्फिंग-आउट) भी रद्द करना पड़ा है.
आमतौर पर वायु सेना प्रमुख के रिटायर्ड होने पर गोल्फ कोर्स के संरक्षक-प्रमुख के रूप में उनके सम्मान में ये आयोजन किया जाता है.
अगले आदेश तक बंद हुआ कॉम्पलेक्स
अधिकारियों ने मंगलवार को कई सदस्यों को संदेश भेजकर सूचित किया कि 28 अक्टूबर सुबह 5 बजे से ये परिसर अगले आदेश तक बंद रहेगा. रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन के भीतर स्थित ये सुविधा केंद्र सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारियों की ओर से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है.
इस परिसर का बंद होना केंद्र सरकार की उस मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत प्रधानमंत्री आवास के आसपास स्थित हाई-वैल्यू सरकारी जमीनों के इस्तेमाल की समीक्षा की जा रही है. सरकार का मकसद इन संपत्तियों को सार्वजनिक उपयोग में लाना है.
ये स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स क्षेत्र की उन कई संपत्तियों में शामिल है जो सरकार के इस भूमि वापसी अभियान के दायरे में आई हैं. इससे पहले लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस दिल्ली रेस क्लब और इंडियन पोलो एसोसिएशन से जुड़ी जमीन को वापस ले चुका है. वहीं, दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई चल रही है.
दिल्ली जिमखाना क्लब का मामला अदालत में
बता दें कि केंद्र सरकार ने 22 मई को दिल्ली जिमखाना क्लब को एक नोटिस जारी कर अपनी जमीन L&DO को सौंपने का निर्देश दिया था. सरकार ने मूल लीज डीड के जनहित क्लॉज का हवाला देते हुए कहा था कि रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए इस जमीन की जरूरत है.
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हालांकि, जिमखाना क्लब ने अपनी लीज कैंसिल किए जाने के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है. वायु सेना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को बंद करने का ये ताजा आदेश जमीन वापसी की प्रक्रिया में एक नया मोड़ माना जा रहा है. हालांकि, सिर्फ परिसर बंद होने से ये साफ नहीं हुआ है कि जमीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई है या सरकार इस भूखंड का आगे क्या इस्तेमाल करने जा रही है.