मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य होने के बाद दिल्ली सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए लागू वर्क फ्रॉम होम (WFH) व्यवस्था खत्म कर दी है. अब सरकारी कर्मचारी पहले की तरह नियमित समय पर दफ्तर आएंगे. सरकार का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद हालात में सुधार हुआ है, इसलिए ऊर्जा बचाने के लिए लागू किए गए अस्थायी कदमों की अब जरूरत नहीं रही.
सीएम रेखा गुप्ता ने शनिवार को इस फैसले को वापस लेने की मंजूरी दे दी. मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि अब अंतरराष्ट्रीय स्थितियां सामान्य हो चुकी हैं. इसी वजह से हर हफ्ते बुधवार और शनिवार को मिलने वाली वर्क फ्रॉम होम की छूट को खत्म किया जा रहा है. इस नए आदेश के बाद अब दिल्ली सरकार के सभी कर्मचारियों को पहले की तरह सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक दफ्तर में रहकर काम करना होगा. हालांकि, नगर निगम (MCD) के कर्मचारियों के समय में कोई बदलाव नहीं हुआ है, वे सुबह 8:30 से शाम 5:00 बजे तक ही काम करेंगे.
क्यों लागू किया गया था वर्क फ्रॉम होम?
दिल्ली सरकार ने मई 2026 में हाइब्रिड वर्क व्यवस्था शुरू की थी. उस समय अमेरिका-ईरान तनाव की वजह से मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता बढ़ गई थी. जिसके चलते होर्मुज से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी. इसी को देखते हुए ईंधन की बचत के लिए सरकारी कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी गई थी.
वर्क फ्रॉम होम के साथ सरकार ने कई दूसरे कदम भी उठाए थे. आधिकारिक बैठकों का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन कर दिया गया था, ताकि यात्रा कम हो. अलग-अलग विभागों के दफ्तरों का समय भी बदला गया था, जिससे ट्रैफिक और ईंधन की खपत कम हो सके.
इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों के लिए पेट्रोल की मासिक सीमा 20 प्रतिशत घटा दी गई थी. इसके अलावा, छह महीने तक नई सरकारी गाड़ियां नहीं खरीदने का फैसला भी लिया गया था. साथ ही लोगों को मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने के लिए कहा गया था. इसके लिए 'मेट्रो डे' और 'नो कार डे' जैसी पहल भी शुरू की गई थी. सरकारी कर्मचारियों की सुविधा के लिए 29 सरकारी कॉलोनियों में 58 विशेष बसें भी चलाई गई थीं.
सरकार का कहना है कि मिडिल ईस्ट में हालात पहले के मुकाबले काफी सामान्य हो चुके हैं. इसी वजह से ऊर्जा बचाने के लिए लागू की गई वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था वापस ली गई है. हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का इस्तेमाल करने की अपील आगे भी जारी रहेगी.