दिल्ली की हवा बुधवार को फिर बिगड़ गई और चार दिन मध्यम श्रेणी में रहने के बाद खराब श्रेणी में पहुंच गई. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक शहर का एक्यूआई मंगलवार के 197 से बढ़कर बुधवार को 229 हो गया. विवेक विहार में यह 316 दर्ज हुआ, जो बहुत खराब श्रेणी है. अगले तीन दिन हवा मध्यम रहने का अनुमान है, लेकिन उसके बाद छह दिन में यह मध्यम से खराब के बीच रह सकती है.
एक्यूआई यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स बताता है कि हवा कितनी साफ या गंदी है. सीपीसीबी के पैमाने पर शून्य से 50 तक अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर माना जाता है. दिल्ली में कुल 58 निगरानी केंद्र हैं. बुधवार को 16 केंद्रों पर हवा मध्यम रही और बाकी 41 केंद्रों पर खराब दर्ज हुई. सबसे ज्यादा प्रदूषित केंद्र विवेक विहार रहा.
इस महीने 21 अक्टूबर को एक्यूआई 245, 22 अक्टूबर को 223 और 23 अक्टूबर को 230 रहा था. इसके बाद लगातार चार दिन हवा मध्यम श्रेणी में रही, लेकिन बुधवार को फिर बिगड़ गई.
दिल्ली की वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के मुताबिक 29 से 31 अक्टूबर तक हवा मध्यम रह सकती है. अगले छह दिन का अनुमान मध्यम से खराब के बीच का है. प्रणाली का कहना है कि वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से कम हो और हवा की औसत रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम हो, तो प्रदूषक तत्व ठीक से बिखर नहीं पाते. मौसम विभाग ने गुरुवार को बादल छाए रहने और मध्यम बारिश का अनुमान जताया है. शुक्रवार को गरज के साथ बारिश हो सकती है.
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प्रदूषण के स्रोतों की बात करें तो डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के मुताबिक बुधवार को सबसे बड़ा हिस्सा परिवहन क्षेत्र का रहा, यानी 19.3 प्रतिशत. ऊर्जा क्षेत्र का योगदान 5 प्रतिशत, दिल्ली और आसपास के उद्योगों का 4.8 प्रतिशत और घरेलू स्रोतों का 5.1 प्रतिशत रहा. निर्माण से 2.5 प्रतिशत, कचरा जलाने से 1.8 प्रतिशत, सड़क की धूल से 1.3 प्रतिशत और अन्य क्षेत्रों से 1.3 प्रतिशत प्रदूषण आया.
एनसीआर के जिलों में गाजियाबाद का योगदान 11.8 प्रतिशत, गौतम बुद्ध नगर का 8.7 प्रतिशत, मेरठ का 8.6 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर का 5.7 प्रतिशत, बागपत का 4.2 प्रतिशत और बुलंदशहर का 3.9 प्रतिशत रहा. फरीदाबाद से 3.06 प्रतिशत, गुरुग्राम से 2.1 प्रतिशत, सोनीपत से 1.5 प्रतिशत और झज्जर से 0.5 प्रतिशत प्रदूषण आया. पराली जलाने का हिस्सा 0.9 प्रतिशत रहा, जबकि अन्य स्रोतों का हिस्सा 9.6 प्रतिशत तक रहा.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) की रोज की रिपोर्ट के अनुसार 27 अक्टूबर को छह राज्यों में खेतों में आग की 129 घटनाएं सैटेलाइट से दर्ज हुईं. इनमें पंजाब में 33, हरियाणा में 1, उत्तर प्रदेश में 18, राजस्थान में 46, उत्तराखंड में 7 और मध्य प्रदेश में 24 घटनाएं थीं. 15 सितंबर से 27 अक्टूबर के बीच कुल 2,267 घटनाएं दर्ज हुईं. इनमें पंजाब में 717, हरियाणा में 22, उत्तर प्रदेश में 324, राजस्थान में 533, उत्तराखंड में 159 और मध्य प्रदेश में 510 मामले रहे. इस दौरान दिल्ली में दो घटनाएं सामने आईं.