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बिहार NDA में बढ़ी रार, JDU ने कुशवाहा की शर्तों को ठुकराया

जनता दल यू के नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि उपेन्द्र कुशवाहा ने बिहार में शिक्षा के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया है. वे केंद्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री हैं, इस नाते उनकी बड़ी जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र मे कोई काम नहीं किया.

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उपेंद्र कुशवाहा (फाइल फोटो)
उपेंद्र कुशवाहा (फाइल फोटो)

केन्द्रीय मंत्री और आरएलएसपी अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा की नई शर्तों पर जनता दल यूनाईटेड ने हमला बोल दिया है. उपेन्द्र कुशवाहा ने एनडीए में बने रहने के लिए अपनी 25 सूत्रीय मांग रखी हैं. ये सारी मांगें शिक्षा से संबंधित है जिसके वो खुद ही केन्द्र में राज्य मंत्री है. बिहार में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति किसी से छुपी नही हैं और इसलिए इसके लिए जनता दल यू ने सिर्फ राज्य सरकार को जिम्मेदार मानने से इंकार कर दिया है.

जनता दल यू के नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि उपेन्द्र कुशवाहा ने बिहार में शिक्षा के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया है. वे केंद्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री हैं, इस नाते उनकी बड़ी जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कोई काम नहीं किया. अशोक चौधरी ने कहा कि उनकी नई शर्त पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है.

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उपेन्द्र कुशवाहा ने शनिवार को एनडीए के सामने एक नया प्रस्ताव रख कर बिहार में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की और कहा कि वे सबकुछ छोड़ने के लिए तैयार हैं, हमें सीट भी नही, चाहिए लेकिन शर्त यही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके 25 सूत्री शिक्षा व्यवस्था संबंधी मांग को मान लें. कुशवाहा की डिमांड पर जनता दल यू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि बिहार में दो तरह की शिक्षा व्यवस्था है उसमें से एक चरवाहा विद्यालय भी हैं उन्हें कौन सी व्यवस्था पसंद हैं.

एनडीए में शेयरिंग को लेकर नाराज चल रहें हैं. उनकी पहली शिकायत जनता दल यू यानि नीतीश कुमार को बीजेपी की तरफ से मिल रही तरजीह से है तो दूसरी अपनी सम्मान को बचाने को लेकर. शुरू में ने उन्हें दो सीट देने की पेशकश की थी लेकिन वो लगातार बयानबाजी करते रहे. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जब उन्हें बातचीत के लिए बुलाया तो वो बिहार में कार्यक्रम का हवाला देकर चार दिन तक दिल्ली नहीं गए. बाद में उपेन्द्र कुशवाहा ने अमित शाह से दो बार मिलने का समय मांग जो नही मिला. फिर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मिलने की कोशिश की वहां भी वे कामयाब नहीं हुए.

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इधर कुशवाहा की पार्टी में लगातार उनके खिलाफ विरोध के स्वर उठ रहें हैं. पार्टी के एक सांसद और दो विधायक एनडीए के साथ रहने की बात करते हैं. ऐसे में अगर उपेन्द्र कुशवाहा का रूख भी करते है तो उनकी पार्टी के कितने लोग उनके साथ जाएंगे ये कहना अभी मुश्किल लग रहा हैं. वैसे 6 दिसंबर को दिन भी नजदीक आता जा रहा है उस दिन उन्हें अधिकारिक तौर पर फैसला करना है कि वह एनडीए में रहेंगे या फिर महागठबंधन का रूख करेंगे.

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