भारत में एक आम धारण ये है कि किसी भी बीमारी को पहले घरेलू नुस्खों से ठीक करने की कोशिश की जाती है. कुछ मामलों में आयुर्वेद का सहारा भी लिया जाता है. स्वाइन फ्लू के मामले में भी ऐसा देखा जा रहा है. लेकिन अगर किसी को ये संक्रमण हो जाए तो क्या आयुर्वेद से इसका इलाज किया जा सकता है? क्या इस बुखार में घरेलू नुस्खों का यूज करना चाहिए या नहीं. इस बारे में में जानेंगे
स्वाइन फ्लू कोई सामान्य सर्दी-जुकाम नहीं है. यह इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाला सांस का संक्रमण है. WHO के अनुसार इन्फ्लुएंजा A फ्लू का कारण बनता हैं और इंसानों में फिलहाल H1N1 और H3N2 जैसे इन्फ्लूएंजा ए वायरस भी फैलते हैं, H1N1 को ही आम भाषा में स्वाइन फ्लू कहा जाता रहा है. बीते कुछ हफ्तों से देशभर में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू?
जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता है तो उससे शरीर में मौजूद वायरस के छोटे - छोटे कण हवा में पहुंच जाते हैं. अगर आसपास मौजूद व्यक्ति इन्हें सांस के साथ अंदर ले सकता है. इसके अलावा संक्रमित सतह को छूने के बाद अगर किसी व्यक्ति ने अपनी नाक या मुंह छू लिया है तो भी इंफेक्शन के फैलने की आशंका होती है.
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क्या आयुर्वेद से स्वाइन फ्लू ठीक हो सकता है?
इस बारे में दिल्ली में आयुर्वेद की डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया है. वह कहती है कि यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है. स्वाइन फ्लू एक वायरल संक्रमण है, इसलिए आयुर्वेदिक काढ़ा या कोई घरेलू नुस्खा वायरस को खत्म करने का प्रमाणित विकल्प नहीं माना जा सकता. आयुर्वेद का इस्तेमाल लक्षणों में राहत और शरीर को सहारा देने के लिए किया जा सकता है, लेकिन डॉक्टर द्वारा बताए गए जरूरी इलाज को इसके भरोसे छोड़ना ठीक नहीं है.
आयुर्वेद में बुखार और सांस से जुड़ी तकलीफों के लिए अलग-अलग उपचार पद्धतियां मौजूद हैं. तुलसी, अदरक, मुलेठी जैसे कुछ पारंपरिक पदार्थों का इस्तेमाल लोग गले की परेशानी या खांसी में राहत के लिए करते हैं, लेकिन इन्हें H1N1 का इलाज मानने के लिए मेडिकल साइंस में न कोई रिसर्च और सबूत है.
घर पर क्या सावधानी रखें?
हल्के फ्लू में आराम करें. ये ध्यान रखें कि शरीर में पर्याप्त पानी हो, डॉक्टर की सलाह पर नारियल पानी भी पी सकते हैं. इस बात का भी ध्यान रखें कि संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें. डॉक्टर की सलाह पर ही कोई इलाज शुरू करें.