इस समय स्वाइन फ्लू से लेकर डेंगू , मलेरिया और टाइफाइड तक के केस बढ़ रहे हैं. इन सब बीमारियों में सबसे आम लक्षण बुखार आना है. कुछ लोगों में बुखार 103 डिग्री तक हो जाता है. ऐसे मामलों में डॉक्टर अस्पताल जाने की सलाह देते हैं, लेकिन कई बार यात्रा के दौरान या अस्पताल दूर होने की वजह से तुरंत डॉक्टर तक पहुंचना संभव नहीं होता. ऐसे में क्या करें कि स्थिति को काबू में किया जा सके.
अगर थर्मामीटर में 102 या 103 डिग्री बुखार आ रहा है तो पहले तापमान दोबारा जांच लें. डिजिटल थर्मामीटर का सही तरीके से इस्तेमाल करें, हर थोड़ी देर में तापमान चेक करते रहें, लेकिन बार-बार जांचकर खुद को परेशान करने की जरूरत नहीं है. इस दौरान ये भी देखें कि सिर्फ बुखार ही है या दूसरे लक्षण भी नजर आ रहे हैं. ये देखें कि बुखार के साथ मुंह सूखना, बहुत ज्यादा कमजोरी तो नहीं है. अगर ऐसा हो रहा है तो फिर ये शरीर में पानी की कमी के लक्षण हो सकते हैं. ऐसे में तुरंत पानी पीना जरूरी है. इसके अलावा ओआरएस या फिर नारियल पानी पी सकते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि बुखार होने पर शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए. फीवर में इस बात का ध्यान जरूर रखें.
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आराम करें, शरीर को ज्यादा गर्म न रखें
सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ जुगल किशोर कहते हैं कि अगर किसी कारण अस्पताल नहीं जा पा रहे हैं तो बुखार में आराम करें. अगर बुखार के साथ शरीर दर्द, सिर दर्द या बहुत ज्यादा बेचैनी है तो पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जाता है. 4 से 6 घंटे में एक पैरासिटामोल दी जा सकती है. इससे बुखार कम करने में मदद मिलती है. लेकिन अगर दवा से भी फीवर कम नहीं हो रहा है तो जल्द से जल्द अस्पताल जाएं.
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सिर्फ बुखार नहीं, इन लक्षणों पर भी रखें नजर
103 डिग्री बुखार के साथ कुछ लक्षण खतरे का संकेत हो सकते हैं. जैसे सांस लेने में परेशानी, बहुत तेज सिर दर्द. अगर ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए, उपलब्ध सबसे नजदीकी इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेने की कोशिश करें. इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर बुखार 103 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर बना रहता है या लगातार बढ़ रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.