अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद एक बार फिर से हार्ट अटैक को लेकर चिंता बढ़ गई है. अंतिम समय में उनका इलाज करने वाले मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर ने बताया कि नाना को कार्डियक अरेस्ट आने से पहले हार्ट अटैक आया था. जो निधन का कारण बना. आमतौर पर ये माना जाता है कि हार्ट अटैक केवल हार्ट की नसों में ब्लॉकेज की वजह से होता है, लेकिन ऐसा नहीं है.
हाल ही में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ़ कार्डियोलॉजी ने संशोधित गाइडलाइन जारी की हैं. इसमें हार्ट अटैक के परिभाषा को आसान बनाना के लिए कुछ चीजों बताई गई है. जिसमें सबसे बड़ी बात यह है कि दिल का दौरा पड़ने के पीछे ब्लॉकेज के अलावा कई अन्य गंभीर कारण भी हो सकते हैं. डॉक्टरों का भी कहना है कि हार्ट अटैक केवल ब्लॉकेज की वजह से नहीं होता है.
मेदांता मूलचंद हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि हार्ट अटैक का कारण प्राइमरी मायोकार्डियल इन्फार्क्शन भी होता है. इसमें हार्ट की नसों में थक्का बनने के कारण होने वाले पारंपरिक हार्ट अटैक तो शामिल हैं ही, लेकिन स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन के कारण भी हार्ट अटैक आ जाता है. इसमें दिल की नस या के अंदरूनी हिस्से में अचानक दरार आ जाती है. यह स्थिति विशेष रूप से महिलाओं और गर्भावस्था के आसपास अधिक देखी जाती है. इसकी वजह से नसें अचानक तेजी से सिकुड़ जाती हैं. जिससे खून का बहाव रुक जाता है. जो हार्ट अटैक का कारण बनता है.
सेकेंडरी मायोकार्डियल इन्फार्क्शन
यह हार्ट अटैक दिल की नसों में किसी खराबी या थक्के के कारण नहीं, बल्कि शरीर में किसी अन्य गंभीर बीमारी की वजह से होता है. जब दिल की मांसपेशियों को मिलने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति और उसकी मांग में भारी असंतुलन हो जाता है, तो यह स्थिति बनती है. इसकी वजह से अचानक ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ या कम हो जाता है. इससे दिल की धड़कन भी तेज हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक का रिस्क होता है.
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प्रोसीजर-रिलेटेड मायोकार्डियल इन्फार्क्शन
ये उस हार्ट अटैक को कवर करती है जो किसी कार्डियक प्रोसीजर (जैसे एंजियोप्लास्टी, स्टेंटिंग या कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी) के दौरान या उसके 30 दिनों के भीतर किसी बड़ी परेशानी की वजह से हार्ट अटैक आ जाता है. ये उन मरीजों में ज्यादा देखा जाता है जिनको पहले से हार्ट की गंभीर बीमारी होती है.
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हार्ट की बीमारियों से बचाव कैसे करें
खानपान का ध्यान रखे
रोज एक्सरसाइज करें
मानसिक तनाव न लें
हर 6 महीने में हेल्थ चेकअप डॉक्टर की सलाह से कराएं